न्यूज़ चैनल पर भूत का इंटरव्यू!
| -RN. Feature Desk - Oct 14 2020 12:53PM

-रामविलास जांगिड़

न्यूज़ एंकर ने चीखते हुए उछलकर चिल्लाया। आइए भूत जी आपका हमारे स्टूडियो में स्वागत है। '...तो बताइए भूत जी आज आप सबसे तेज मीठे न्यूज़ चैनल के स्टूडियो आए। ...तो न आंधी, न तूफान, न बरसात, न चमगादड़। बिल्कुल शांति के साथ आए। यह सब कैसे?' इस प्रश्न पर भूत थोड़ा सा और घबराया। बोला- 'देखिए हम भूत लोगों का धंधा बिल्कुल चौपट हो गया है।

आजकल हमसे कोई नहीं डरता। लाख उल्टे पैर कर लो। आंखें अंदर से बाहर निकाल लो। डरावनी कीही, कीही, कीही आवाज निकाल लो। फिर भी बीत्ते भर की छोरी भी नहीं डरती! जब मैं आपके स्टूडियो में आ रहा था, तो ऑफिस केबिनों में बैठे आपके न्यूज़ रिपोर्टर-रिपोर्टरी से मुंह छुपाता हुआ, डरता फांदता आया हूं। दरअसल आजकल डराने का काम रेपिस्टों और मर्डर बाजों ने ले लिया है। डराने में नेता सिरमौर बन बैठे हैं।

न्यूज़ रिपोर्टर भी डराने के धंधे में आगे खड़े हैं। इसलिए हम भूत लोगों का डराने का धंधा बिल्कुल खत्म हो गया है।' तब एंकर ने ऊंची आवाज में तेज चीखा- 'लेकिन डराने के मामले में आप का एकाधिकार था। आप रात को ठीक 12:00 बजे बाद ही अपनी पूरी भूत ड्रेस पहन कर निकला करते थे। खंडहर और हवेलियों में आप तेज सांय-सांय और आंधी तूफान के साथ अच्छे भले कुत्तों तक को डरा देते थे। अब ऐसा क्या हुआ, जो अचानक यह सब ठप हो गया?' तब भूत ने एकदम सिकुड़ कर सहमते हुए कहा- 'एक तो प्लीज आप थोड़ा धीरे बोलें! मुझे आपकी चीख से बहुत डर लग रहा है। पक्का है, आज मुझे बुखार आएगा।

मुझे आपकी ड्रेस देखकर भी बहुत कंपकंपी छूट रही है। रही बात रात 12:00 बजे बाद निकलने की उसमें तो हम भूत लोगों को बहुत डर लगता है। इधर रात को होटलों में बहुत नेता लोग निकलते हैं। रिसोर्टों में ड्रग्स और रेप-रेव की कई पार्टियां होती है। वहां चीख-चीखार, धूम-धकाल, धुआं-धमाका सब होता है। इनसे हम भूत लोगों के मन में दहशत है। मेरे डैडी जाने-माने भूत थे। जब वे पांव उल्टे करके श्मशान से निकलते तो चारों ओर हाहाकार मच जाता। उनके डर के मारे अच्छे-अच्छे पहाड़ों के भी पसीने छूट जाते। डैडी अब मुझे समझाते हैं। बेटा! अब जमाना बदल गया है। अब तुम आधी रात को श्मशान से बाहर मत निकला करो।'

भूत ने आंखें मींचकर डरते हुए कहना जारी रखा- 'इधर श्मशान में ही शांति है, बाकी सब जगह क्रांति है। पूरी दुनिया में भ्रांति है। श्मशान को छोड़कर हर जगह लड़ाई-दंगा, फसाद, चालबाजी, धोखेबाजी है। मेरी मम्मी जो एक प्रसिद्ध चुड़ैल रही, वह बेचारी भी बहुत डरती है। मम्मी ने घर से बाहर निकलते समय आज ही मेरे गले में यह काला ताबीज डाला। पांच नींबू काटे। उतारा कर मेरे पांव के नीचे से निकलवाए। ताकि मुझे किसी नेता की नजर न लग जाए! कहीं मैं सोशल मीडिया की चपेट में मैं न आ जाऊं। कोई न्यूज़ चैनल मेरे पीछे न पड़ जाए! इसलिए बहुत डरता हूं। ...और अपने श्मशान के बाहर हरगिज़ नहीं निकलता।

चाहे श्मशान की राख में लिपटी पुरानी हड्डियों को चाट कर ही दिन क्यों न बिताने पड़े! ...और। ...और वह देखो सामने। सफेद कपड़ों में लिपटा नेता आ रहा है। ...अरे नेता आ रहा है। हे रावण! मुझे बचाओ! कोई बचाओ! ब चा ओ!' जब भूत अचानक श्मशान से निकला तो उसके शरीर से पसीना चू रहा था। चुड़ैल मम्मी ने रात 2:00 बजे भूत को ताजा हड्डी ब्रेकफास्ट में देते हुए कहा- 'क्या हुआ बेटा? कोई बुरा सपना देख लिया क्या?' 'हां मम्मी! सपने में मुझे बहुत डर लग रहा था। इन न्यूज़ चैनलों से। रेपिस्टों से। नेताओं से।' कहकर भूत, चुड़ैल मम्मी के सीने से लिपट गया। न्यूज़ चैनल पर भूत का इंटरव्यू अधूरा ही रह गया।



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