रावण का फुल सीजन है सामने!
| -RN. Feature Desk - Oct 17 2020 12:39PM

-रामविलास जांगिड़

नरक पालिकाओं में विभिन्न प्रकार के रावण बनाने का धंधा इस बार बहुत तेज चल रहा है। नरक पालिका अपने नागरिकों को और ज्यादा नारकीय जीवन प्रदान करने के लिए कृत संकल्प है। रावण बनाने से लेकर जलाने तक जो घालमेल करने का वार्षिक कार्यक्रम नरक पालिकाओं में होता है, वह इस बार नए ढंग से बढ़ रहा है। रावण बनाने वाले और जलाने वाले दोनों ही जीव मिलकर कोरोना को धन्यवाद दे रहे हैं। इस बार अलग ढंग के गोपनीय रावण बन कर अपनी लंबाई बढ़ाते जा रहे हैं।

अलबत्ता रावण जरूर बैठा-बैठा हंस रहा है कि इस बार मुझे जलाने से मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए वह बाकायदा कोरोना का आभार व्यक्त करने के लिए अपने मुंह पर मास्क लगा चुका है। रावण ने मेघनाथ और कुंभकरण संग कोरोना को बधाई देने के लिए मार्केट में छलांग लगा दी है। कोरोना काल में रावण की आत्मा को और ज्यादा आनंद मिल रहा है। कई रावण तो इस प्रकार के बने कि वे कोरोना में से भी माल खींचने में पीछे नहीं हट रहे हैं। कोरोना की जांच और उसकी सांच के बीच में कई मेघनाथ और कुंभकरण की सांसें चल रही है।

हर बार हर नरक पालिका अपने-अपने रावण की लंबाई, ऊंचाई और चौड़ाई बढ़ाने का दावा करती आई है। बरसों से स्वर्ग पालिका बेचारी ठंड खाई बेसुध पड़ी है। हर नरक पालिका का अपना एक दावा होता है कि उसका ही रावण सबसे बड़ा और कुख्यात होगा। उसका ही रावण होगा जो आंखों से अंगारे छोड़ेगा और अपनी तलवार को हवा में लहराएगा। इसलिए कई तरह के रावण मार्केट में अपना रूप बदलकर हाजिर हुए हैं। देवता बेचारे मुंह पर मास्क चढ़ाए घर में लॉकडाउन हुए पड़े हैं।

अफवाहों का रावण तो इतना गजब का है कि वह सब पर भारी पड़ने लगा है। बाकायदा अफवाहों की मंडी सजी हुई है। लोग अफवाह बेच-खरीद रहे हैं। अफवाह के रावण ने पूरे मार्केट में दबदबा जमा रखा है। यह चीन होते हुए अफगानिस्तान पाकिस्तान के रास्ते पूरे देश में फैला हुआ है। पाकिस्तान में अफवाह का रावण अपने पांव पसारे बैठा है। चीन अफवाही रावण फैलाने के मामले में बड़ा गुरु है। सोशल मीडिया पर इसकी लंबाई दिन-दूनी रात-सौगुनी बढ़ रही है। न्यूज़ चैनलों पर इसे आकर्षक रंग, रूप और डिजाइन में प्रस्तुत किया जा रहा है।

सच में रोकड़ा कूटने के लिए अपने भीतर के रावण को जगाना ही पड़ता है। कुबेर रावण का सौतेला भाई था। कुबेर धनपति था। वास्तव में कुबेर ने ही सोने की लंका बनाई थी। लेकिन रावण ने कुबेर से लंका को हड़पकर उस पर अपना शासन कायम किया। ठीक ऐसे, जैसे आजकल चीन कर रहा है। जैसे पाकिस्तान मचल रहा है। इधर सीता के हरण पर रावण का वध कर उत्सवधर्मी देश की कितनी ही सीतायें रोज किसी न किसी रावण के हाथों बेइज्जत हो रही है।

कटक से अटक तक। सरे राह रावणों के बीच अपमानित होती बेजान पड़ी है सीतायें! कभी दिल्ली में किसी सड़क पर दौड़ती बंद कार में तो कभी मुंबई के बंद कमरों में! देश में असली रावण आजाद घूम रहे हैं और उनके पुतले जलाकर न्याय करने का उत्सव मनाया जा रहा है। रावण काल में यह सब उचित ही है। रावण का फुल सीजन जो सामने दिखाई दे रहा है!



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