महबूबा मुफ्ती की बदज़ुबानी
| -RN. Feature Desk - Oct 26 2020 1:30PM

अगर कश्मीर के ये नेता लोग राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं तो महबूबा मुफ्ती अपना वह बयान वापस लें जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं भारत के तिरंगे को कभी हाथ में नहीं लूंगी बल्कि अपनी रियासत के हल वाले झंडे को थाम लूंगी और इलेक्शन भी नहीं लडूंगी।बदज़ुबानी भी की कि लुटेरे-डाकुओं ने हमारा हक हम से छीन लिया। ध्यातव्य है कि अनुच्छेद 370 के हटते ही सचिवालय और अन्य जगहों पर से स्थानीय झण्डे को उतार दिया गया था और मात्र एक तिरंगा झंडा फहराया गया था और इसी के साथ “एक देश-एक निशान-एक विधान-एक प्रधान” का संकल्प पूरा हो गया था।

अखंड भारत की नींव रखने वाले इस ऐतिहासिक फैसले से अब जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक विधान, एक निशान और एक प्रधान होगा। दरअसल, जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जो सपना देखा था और वर्ष 1952 में जम्मू की एक विशाली रैली में संकल्प लिया था कि एक देश में दो निशान, दो प्रधान दो विधान नहीं चलेंगे, वह पूरा हो गया। अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक निशान और एक संविधान लागू हो गया है।जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है जम्मू कश्मीर में अब एक ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।

इससे पहले तिरंगे के साथ जम्मू-कश्मीर का अपना ध्वज भी फहराया जाता था। जम्मू-कश्मीर में अब आईपीसी लागू होगी, इससे पहले वहां पर रणवीर दंड संहिता लागू थी, जिसे अब पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए अभी तक संसद केवल रक्षा, विदेश मामले और संचार से जुड़े कानून बना सकती थी। इससे अलग किसी भी कानून का विधानसभा में पारित होना आवश्यक था, किन्तु अब संसद से पारित कानून यहां सीधे लागू होंगे। जम्मू-कश्मीर के लोगों के पास दोहरी नागरिकता थी। स्थायी नागरिकों को ही यहां वोट का अधिकार था। दूसरे राज्यों के लोग यहां न वोट दे सकते थे और न चुनाव लड़ सकते थे और न स्थायी तौर पर बस सकते थे।

सरकारी नौकरी भी नहीं कर सकते थे।अब देश का कोई भी नागरिक यहां मतदाता या उम्मीदवार बन सकेगा और सरकारी नौकरी भी कर सकता है। कश्मीर के इन दोनों राजनीतिक परिवारों (अब्दुल्ला और मुफ़्ती) ने अपने हितों की रक्षा के लिए धारा 370 को हटाए जाने का हमेशा विरोध किया है। शायद इसलिए ताकि अनुचित तरीकों से कमाई उनकी संपत्ति पर पर्दा पड़ा रहे। समय आ गया है जब उनसे इस बात का जवाब तलब किया जाय कि एक अकूत संपत्ति उन्होंने कहाँ से अर्जित की?



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