वादा निभाना नहीं भाता है तुझको!
| -RN. Feature Desk - Oct 27 2020 1:20PM

-रामविलास जांगिड़

हमारे सियासतदानों ने नहीं सुधरने की कसम खा ली है व हर दिशाओं से वादे फेंकने के लिए अपनी कुर्सी जमा ली है। हर एक को पता है कि उनके सारे वादे धूल-धूसरित धुआं-धुआं ही हो जाने हैं। घोषणा पत्र किसी अंधेरी कोठरी में कैद होकर रो-कर मर जाने हैं।संकल्प पत्र के सारे विकल्प खुलकर इधर-उधर भाग जाने हैं। विजन डॉक्यूमेंट में न विजन रहता है और न ही कोई डॉक्यूमेंट! वादा पत्र की सारी स्याही वादों की याद में आंसुओं से धो दी जाती है।

वादा निभाने की बातें सिर्फ सत्ता की ओर ले जाती हुई दिखाई देती है। एक ने वादा किया कि मैं 10 लाख नौकरियां दूंगा, तो दूसरे ने पूछा कि यह 10 लाख नौकरियां देने के लिए तुम धन कहां से लाओगे? फिर इसी समय दूसरे ने भी 19 लाख नौकरियां हवा में छोड़ दी। तीसरे ने 30 लाख नौकरियां आसमान में बिखेर दी। वादा ही तो करना है! अमल में थोड़ी लाना है। जब चुनाव सामने हो तो वादे जमीन तोड़कर फटने लगते हैं।

आसमान से घोषणाएं ही बरसने लगती है। चुनाव आगे कोरोना की गाइडलाइन भी कोने में पड़ी सिसकने लगती है। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां तो दिन में 50 बार उड़ती है। जो वैक्सीन अब तक नहीं बनाई गई उसको भी मुफ्त बांटने का वादा किया जाता है। फिलहाल वादों के धमाकों से बिहार दहल रहा है। चुनाव समय बारी-बारी से हर जगह वादों के धमाकों से ही उड़ाई जाती है।

हे वादे महाराज! तुम्हारी जुदाई का कड़वा घूंट रोज पी रहा हूं। हे वादे! तेरे झूठ के मीठे हौसले पर मदमस्त सपने देख रहा हूं! ख़्वाबों में रोज वादे जी को अब भी पुकारता हूं। हे सियासत बाज! तेरे हर वादों पे कर भरोसा ना-फिक्र घूमता था। तेरे संकल्प पत्र और घोषणा पत्रों को निकाल-निकाल कर हर एक शब्द, वाक्य और पंक्तियों को चूमता था। तुम मुझसे वोट लेकर भी तो बात ना कर सके।

तेरे वादों के यादों में अक्सर अब सिसकता और रोता हूं। हे सियासती! मुझे सब पता है कि तेरे कसमे, वादे, प्यार, वफ़ा सब बातें हैं। बातों का क्या! तू तो चुपके से ले जा मेरा वोट। यह पक्का पता है की यहां इस धरती पर कोई किसी का नहीं है। देश सेवा, समाज सेवा और गरीब की सेवा के ये झूठे नाते हैं। नातों का क्या! तेरा अपना चमचा ही आखिर तुझको झाड़ चढ़ाएगा। हे नेता वादों से मुकरने वाले!

हे आसमान में उड़ने वाले! आप भगवान को भी धोखा देने में माहिर हैं फिर मुझ वोटर कि क्या बिसात! बस रो-रो कर यही गाता हूं! क्या हुआ तेरा वादा, वो क़सम वो इरादा! मुझको तूने कहा था तुझ से हर पल मिलने आऊंगा! तेरे दुख में दुखी और तेरे दर्द की हर दवा लाऊंगा! वादे ही तोड़! तू वादे ही तोड़! मेरी घटती जवानी तड़पे, तू मुंह अपना मोड़। तू वादे ही तोड़! नींद हमारी नेता तूने चुराई।

मंत्री बन छुप गया तू हरजाई। जिंदा मरे हैं सब तेरे वादों से यहां पे। वादे ही उड़ा गली गांव जहां पे। वादा न निभाना आता है तुझको! झूठी बोली में बिठा के सपने दिखा जा मुझको! वादा निभाना नहीं भाता है तुझको! अर्ज किया हुजूर! ये वादे, ये भरोसे, उफ्फ़ हथियार बहुत हैं! अजी! क़त्ल करते रहिए यहां सब तैयार बहुत हैं!



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