आदर्श उल्लू आचरण संहिता
| -RN. Feature Desk - Oct 30 2020 2:28PM

-रामविलास जांगिड़

दीपावली पर देश में उल्लुओं की मांग बढ़ गई है। उल्लुओं का व्यापार करने वाले नेता जी एक-एक उल्लू को किसी एक पार्टी से निकालकर किसी दूसरी पार्टी को दो से छह करोड़ में बेच रहे हैं। इसके लिए वे कुर्सी तंत्र क्रिया करने वाले से एडवांस लेते हैं। चुनावी दीपावली के दिन कुर्सी तांत्रिक तंत्र-मंत्र को जगाने का काम करते हैं। कुर्सी अधिनियम के तहत उल्लुओं का शिकार करना परम आदरणीय है। साथ ही देश में उल्लुओं की खरीद-फरोख्त भी निरंतर जारी है।

मंत्री पद के कुर्सीकांक्षी उल्लू की चुनावी दीपावली के समय रेट 20 गुना बढ़ जाती है। उल्लू के जातिगत वोट वजन, वोटिंग आकार, सियासी रंग व बयानबाजी के पंख फैलाव के आधार पर रेट तय होती है। लाल चोंची रंगीन बयानवीर और शरीर पर भ्रष्टाचारी सितारा धब्बे वाले उल्लू का रेट 15 करोड़ रुपए से अधिक होता है। दीपावली में उल्लू की मांग को देखते हुए नेता, मंत्री और अफसर इसके लिए एडवांस देते हैं। एक बार लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू उनसे रूठ गया।

लक्ष्मी जी ने पूछा तो बोला कि आपकी सब पूजा करते हैं मगर मुझे कोई नहीं पूजता। तब लक्ष्मी जी बोली कि आज से हर पाँच साल में वोटर के रूप में हर नेता तुम्हारी पूजा करेंगे। तब से लेकर आज तक चुनावी दीपावली से ठीक 1 दिन पहले तक नेता भाषण देते रहते हैं। प्रायः संसद के ऊँचे गुंबद वाले स्थान व विभिन्न आयोगों के खोडरों में उल्लू अपना निवास बनाते हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान में करांची, लाहोर, पेशावर से लेकर क्वेटा, इस्लामाबाद तक गजब के उल्लू बनाए जाते हैं जिन्हें लालची सत्ताधीश गधा व कुत्ता भी बना देते हैं।

उल्लू ही एक ऐसा शब्द है जिसे बोलने पर मुँह उल्लू जैसा और शरीर गर्दभ-सा बन जाता है। वाट्सअप युगीन लोगों का यह विश्वास है कि उल्लुओं को किसी भी इंटरनेट की मृत्यु के समय का पहले से ही पता चल जाता है। तब उल्लू आसपास की सोशल साइट पर आकर अक्सर बोलने-चीखने लगते हैं और तमाम फालतू-पालतू मैसेज वायरल करते हैं।

उल्लू अपनी धूर्त आँखों और मक्कारी गोल बनावटी चेहरे के कारण संसद में बहुत प्रसिद्ध होते हैं। ये बहुत कम रोशनी में भी भ्रष्ट आचरण का रास्ता ढूंढ़ लेते हैं। इन्हें रात्रि में शिकार करने में ज्यादा मजा आता है। इसीलिए उल्लू एक रात्रिचारी नेता कहलाता है। गधे का बच्चा बड़ा होकर गधा बनता है। उल्लू का बच्चा बड़ा होकर उल्लू बनता है; परंतु एक नेता का बच्चा बड़ा होकर गधा भी बन जाता है और उल्लू भी। मौका पाकर वह ढेरों इंसानों को शानदार तरीके से कुत्ता, उल्लू व गधा बना सकता है।

एक नेता ने चुनावी बयान जारी किया। कहा- 'मैं उल्लू हूँ लेकिन इतना बड़ा उल्लू भी नहीं। किसानों, दलितों, मजदूरों आदि को उल्लू बनाने के लिए बहुत जरूरी है कि चुनाव काल में आदर्श उल्लू संहिता जारी की जाए।' नेताजी ने गुस्से में पीए से कहा- 'क्या करते हो! तुमने कभी उल्लू नहीं देखा?' पीए ने सिर नीचे झुकाते हुए कहा, नहीं सर! नेताजी ने जोर से डाँटा और चिल्लाकर कहा -'नीचे क्या देख रहे हो, मुँह ऊँचा करके मेरी तरफ तो देखो!'

दिल्ली के पंडित कुर्सीराम जी का कहना है कि यदि नेताजी वोटरी-उल्‍लू की पूजा पूरे विधि-विधान से करते हैं, तो उनकी कोठी में कार व कन्या का निरंतर सेवन किए जाने के योग बनते हैं। इससे साल भर कोठी में लक्ष्‍मी, रमा, कमला आदि आती रहती है। लेकिन हाँ! उल्‍लू की पूजा में किसी प्रकार का विघ्‍न नहीं होना चाहिये। इसके लिए किसी विशेष मीडिया पंडित के द्वारा ही पूजन कर सोशलगिरी करनी चाहिये। दीपावली में आदर्श उल्लू आचरण संहिता का पालन करने वाले समस्त नेताजी जन्म-जन्मांतर कुर्सी वरण करते रहते हैं।



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