खोमचे में सजी है वैक्सीन!
| -RN. Feature Desk - Nov 9 2020 12:30PM

-रामविलास जांगिड़

इन दिनों शहरों-कस्बों की सड़कों पर हर जगह खोमचे और फेरीवाले कोरोना वैक्सीन हाथों में लटकाए नजर आ रहे हैं। कोरोना वैक्सीन का हर जगह जलवा कायम है। सड़कों के किनारे-किनारे जहां तक नजरें पसारें कोरोना वैक्सीन बेचने वाले खड़े हैं। स्कूलों और कॉलेजों के बाहर खोमचे वाले खूब दिखाई पड़ते है। इसके अलावा मेलों, प्रदर्शनियों, शादी-समारोह, रेलवे स्टेशनों तथा बस अड्‌डों के पास भी इनका जमाव दिखाई देने लगा है। वैक्सीन वाले भाई जान ऐसे स्थानों पर आवाज लगा-लगा कर अपना माल बेचते हैं, जहां बहुत-से लोग आते-जाते है। आमतौर पर फेरी या खोमचे वाला बहुत साफ-सुथरी सफेद पोशाक पहनता है। वह सफेद-झक कमीज और पाजामा पहनता है। गले में पार्टी विशेष का गमछा लटकाए अक्सर वह सिर पर टोपी पहनता है। उसकी टोपी पार्टी के टोकरे या खोमचे को सिर पर रखने में सहायता देती है। इसी की सहायता से वह कोरोना काल में रोकड़ा खींच रहा है। डॉलर हाथ में लिए वह अपनी मुट्ठियां भींच रहा है।उसके कपड़े दलाली के पसीने, कमीशनी धूल और भतीजावादी गर्द आदि से भरे रहते हैं और उन पर तरह-तरह के बेहतरीन खुशबूदार दाग दिखाई देते हैं। इसी कमीज पर चमचा टाइप के मक्खी-मच्छरों की कई पीढ़ियों ने अपनी शादी रचाकर हनीमून भी मनाया।

अक्सर वह अपनी कमीज से ही डस्टर का काम लेता है। वैक्सीन को वह इसी डस्टर से अच्छे से साफ करता है, जैसे कोई घाघ पुराना नेता अपने पुराने नारों को नई टोपी से चमकाता हो। वह अपने बायें हाथ में बांस की लम्बी तिपाई-सी लिए रहता है, जिस पर वह अपनी कोरोना वैक्सीन का थाल या टोकरा रखकर वोटरों को वैक्सीन दिखाता और बेचता है। चुनाव से ठीक पहले जैसे कोई नेता अपने घोषणा पत्रों को सजाता हो। ये लोग दाहिने हाथ में एक घंटी लिए रहते है, जिसे बजाकर वे वोटरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अपने मुंह को गोल-गोल या सीधे-सपाट बनाकर सीटी मारते हुए वैक्सीन की जुमलेबाजी करते हैं। आदर्श वैक्सीन फेरीबाज रोजमर्रा के इस्तेमाल की असाधारण वस्तुएं बेचता है। इनमें दलाली, कमीशन, भाई-भतीजावाद, हेरा-फेरी, ठगबंधन आदि होते हैं। वह जो भी बेचता है, उसे एक बड़ी थाली या टोकरी में पार्टी के नियम सजाकर जरूर रखता है। वह अपने नारों-जुमलों आदि को ढंकता नहीं, बल्कि वोटरों को आकर्षित करने के लिए खुला रखता है। वह थाल में शिलान्यास व उद्घाटन के पत्थरों को ऐसे लगाता है कि वोटरों को एक ही दृष्टि में सभी पत्थर एक साथ दिखाई दे जाएं। वह चुनावी काल में घर-घर और मौहल्ले-मौहल्ले में घूमकर वादे बेचता है। 

वह भोंपू लगाकर तेज आवाज से अपने मीठे-मीठे वादों के नाम लेकर आवाज लगाता है। कभी-कभी हाथ की घंटी बजाकर अपनी उपस्थिति दर्शाता है। बड़ी पार्टी के फेरी वाले बड़े चालाक होते हैं। उन्हें यह भली-भाँति ज्ञात होता है कि वे किसी किशोर, वृद्ध अथवा गुजरते हुए भोले-भाले वोटर को कैसे आकर्षित करें। वह अपने अनूठे ढंग से घंटी बजाता है और फिर अपने निजी ढंग के मीठे बोल बोलकर वादों-संकल्पों के नाम बताता है। कभी-कभी वह गाने गा-गा कर, लटके-झटके कर वोटरों को रिझाता है। वह अपने शरीर से भी तरह-तरह की मुद्रायें बनाकर वोटरों को प्रभावित करता है। वह अपनी जुमलेबाजी से कोरोना वैक्सीन के कूट-सच्चे गुणों का बखान करता है और अपनी वैक्सीन बेचने में सफल हो जाता है। वैक्सीन बेचने वाले खोमचे वालों के सामने न केवल छोटे बल्कि बड़े लोगों को भी बड़े स्वाद से वैक्सीन चाटते देखा जा सकता है। दर्द कोई भी हो, ये वादों की वैक्सीन हर समय अपने खोमचे में सजाए तत्पर दिखाई पड़ते हैं।



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