मृदुला सिन्हा नहीं रही
| -RN. Feature Desk - Nov 20 2020 2:12PM

गोआ की पूर्व राज्यपाल और साहित्यकार मृदुला सिन्हा का निधन हो गया है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने शोक जताया है। श्रीमती सिन्हा का जन्म 27 नवंबर 1942 को मुजफ्फरपुर में हुआ था। मृदुला सिन्हा एक सफल राजनीतिज्ञ के अलावा लोक परंपराओं के बारे में भी लिखती रही हैं।

'जनसत्ता' में वे लोक संस्कृति से जुड़े विषयों पर अक्सर लिखा करती थी। उस ज़माने में मेरे भी समसामयिक मुद्दों पर सारगर्भित पत्र जनसत्ता/चौपाल में छपते थे।कई बार हम साथ-साथ छपे हैं। सिन्हा के निधन पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि मृदुला सिन्हा जी को जनता की सेवा के लिए उनके प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। वह एक कुशल लेखिका भी थीं, जिन्होंने साहित्य के साथ-साथ संस्कृति की दुनिया में भी व्यापक योगदान दिया। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।  

भारत सरकार में गृह मंत्री अमित शाह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है। शाह ने ट्वीट के जरिए उन्हें याद किया। उन्होंने लिखा 'गोवा की पूर्व राज्यपाल व वरिष्ठ भाजपा नेता मृदुला सिन्हा जी का निधन बहुत दुःखद है। उन्होंने जीवन पर्यन्त राष्ट्र, समाज और संगठन के लिए काम किया। वह एक निपुण लेखिका भी थी, जिन्हें उनके लेखन के लिए भी सदैव याद किया जाएगा। उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ। मृदुलाजी अब इस संसार में नहीं रही। मग़र मुझे इस बात को रेखांकित करने में अपार हर्ष हो रहा है कि लेखकों/विद्वानों को समुचित सम्मान देने में वे पीछे नहीं रहती थी।

कई वर्ष पूर्व गोआ से उनके कार्यालय के एक सहायक का मेरे पास फोन आया कि राज्यपाल महोदया ने केंद्रीय राजभाषा विभाग की हिंदी सलाहकर समितियों के लिए मुझे सदस्यके रूप में नामित करने हेतु मेरे नाम की अभिशंसा की है।अतः मैं अपना संक्षित आत्म-परिचय/पता आदि गृह मंत्रालय के अमुक अधिकारी के नाम तुरन्त भेज दूँ। कुछ समय बाद भारत सरकार ने विधि और न्याय मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति में सदस्य के रूप में मुझे नामित किया और इस आशय का गैज़ेट नोटिफिकेशन भी निकाला।

आज सोचता हूँ कि न तो मैं मृदुलाजी के राज्य का निवासी,न मैंने कभी उन्हें देखा और न ही मेरी कोई राजनीतिक पैठ। हाँ, इतना ज़रूर है कि  बहुत पहले बिहार राजभाषा विभाग ने मेरी हिंदी-सेवाओं के लिए मुझे ताम्रपत्र और नकद राशि से पुरस्कृत किया था।ये बातें जगन्नाथ मिश्र के कार्यकाल की हैं। मृदुलाजी का यह सम्मानजनक व्यवहार देख मैं यह मानने लगा हूँ कि सचमुच 'नियति' भी कोई चीज़ होती है। आपके भाग्य की चीज़ आपको किसी न किसी तरीके से मिल ही जाती है।

-डॉ० शिबन कृष्ण रैणा



Browse By Tags



Other News