वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से अयोध्या के महिला शरणालय एवं बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण
| -RN. News Desk - Nov 20 2020 3:01PM

अम्बेडकरनगर। माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद एवं जनपद न्यायाधीश, अम्बेडकरनगर के निर्देशानुसार जनपद अम्बेडकरनगर में गठित शेल्टर होम्स निरीक्षण कमेटी द्वारा जनपद अयोध्या में स्थित महिला शरणालय एवं बाल सम्प्रेक्षण गृह का निरीक्षण ए0डी0आर0 भवन से वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती पूजा विश्वकर्मा, अपर जिला जज, पॉक्सो द्वितीय, विशेष न्यायाधीश एन0डी0पी0एस0/गैंगेस्टर अधिनियम, अम्बेडकरनगर एवं सदस्य अशोक कुमार-ग्प्प्, सचिव/मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर व सुश्री प्रीती भूषण, सिविल जज जू0डि0, टाण्डा, अम्बेडकरनगर द्वारा किया गया।

उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2020-21 के अनुपालन में डॉ0 बब्बू सारंग, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के आदेशानुसार ‘महिला शरणालय, अयोध्या में बालिका बचाओ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर एवं बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या में शिक्षा का महत्व विषय पर वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में श्री अशोक कुमार-ग्प्प्, सचिव/मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या से श्री कृष्ण भगवान मिश्र, अधीक्षक एवं महिला शरणालय, अयोध्या से श्रीमती भारती शुक्ला, प्रभारी अधीक्षिका द्वारा वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से उक्त शिविरों में प्रतिभाग किया गया। 

अशोक कुमार, सचिव/मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर ने  वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से शिविर को सम्बोधित करते हुये बताया कि महिलायें समाज का बहुत महत्वपूर्ण अंग हैं और पृथ्वी पर जीवन के हर एक पहलू में बराबर भाग लेती हैं हालांकि भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के कारण स्त्रियों के निरन्तर गिरते लिंग अनुपात ने देश में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। इसलिये लिंगानुपात को समान करने के लिये बालिकाओं को बचाना बेहद आवश्यक है।

उन्होने लड़का एवं लड़की में भेद-भाव न करने पर बल देते हुये कहा की यदि अल्ट्रासाउंड मशीन से किसी भी प्रकार की गलत जांच चिकित्सकों द्वारा की जा रही है उसमें जुर्माना एवं सजा दोनो का प्राविधान है एवं बताया आज का सभ्य समाज कुरीतियों में घिरता चला जा रहा है इस टेक्नोलॉजी के युग में बेटियों को भ्रूण में ही समाप्त कर दिया जाता है। टेक्नोलॉजी का उपयोग हमेशा अच्छे कार्यों के लिये होना चाहिये जिससे देश का विकास हो किन्तु आज के समय में इसका उपयोग विध्वंस कार्यों के लिये किया जा रहा है। जिसका परिणाम भविष्य में अत्यंत घातक होने वाला है और यदि समय रहते हम नहीं जागे तो इस विध्वंस से हमें कोई बचा नहीं सकता है। 

सचिव ने घटते लिंगानुपात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बालिकाओं के लिये समाज में जागरूकता पैदा करने के बावत बल दिया, यदि समाज में जागरूकता पैदा होगी तो भू्रण जांच स्वतः ही बन्द हो जायेगी और लोग लड़के-लड़कियों में फर्क नहीं करेगें। उक्त शिविर के साथ-साथ जिला सम्प्रेक्षण गृह किशोर अयोध्या में वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से शिक्षा का महत्व विषय पर विधिक साक्षरता शिविर में प्रतिभाग किया गया तथा उक्त विषय पर सचिव महोदय द्वारा किशोरों को जानकारी दी गई। 
 



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