कोरोना की जंग में जीवनदायी बन रहे हैं सरकारी डेडिकेटेड कोविड सेंटर
| -RN. Feature Desk - Dec 1 2020 1:44PM

-डॉ राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

यदि कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो कोरोना की जंग केवल और केवल सरकारी डेडिकेटेड कोविड सेंटरों के माध्यम से ही बेहतर तरीके से जीती जा सकती है। यह मैं अपने प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर साझा कर रहा हूं। दीपावली की सुबह लगभग काल बनकर ही मेरे लिए आई थी पर जयपुर का सरकारी आरयूएचएस अस्पताल नया जीवन दाता बन कर उभरा। यह कोई जयपुर या राजस्थान के हालात नहीं बयां कर रहा बल्कि जिस तरह की व्यवस्थाएं सरकार द्वारा कोरोना संक्रमितों के लिए की जा रही है वह वास्तव में सराहनीय है। लगभग देश के सभी सरकारी डेडिकेटेड कोविड सेंटरों में कमोबेस यही स्थिति है। पर सामने धवल पक्ष के स्थान पर स्याह पक्ष को लाया जा रहा है।

दीपावली की सुबह परिजनों ने शुभचिंतकों के सहयोग से अतिगंभीर स्थिति में आरयूएचएस के आउटडोर में दिखाकर वार्ड 8 के बेड नंबर 823 पर भर्ती कराया। तत्काल ईलाज शुरु हुआ और दो दिन में एक दो बार बेहोसी को देखते हुए स्वयं आरयूएचएस प्रभारी डॉ. अजित सिंह ने आकर रुम नंबर 836 में शिफ्ट किया। तत्काल रेमडेसिविर के साथ अन्य इंजेक्शन और ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई। यहां में यह कहना चाहता हूं कि यह व्यवस्था कोई मेरे लिए नहीं अपितु आरयूएचएस में आने वाले सभी कोरोना मरीजों के लिए हो रही है।  वह भी पूरी तरह निःशुल्क। इसके बाद जिस तरह का बेहतरीन ईलाज एसएमएस हास्पिटल के नोर्थ विंग वार्ड में डा. नवल व उनकी टीम द्वारा उपलब्ध कराई गई वह वास्तव में धरती के भगवान का साक्षात रुप देखने को मिला।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कोरोना के प्रति जिस तरह का विजन, वार्डो में बेड की अधिक व्यवस्थाएं व कोविड सेंटरों पर मरीज के नाश्ते से लेकर महंगी रेमडेसिविर जैसी दवाओं की निःशुल्क व्यवस्था की गई वह मरीजों के लिए बड़ी राहत से कम नहीं आंकी जा सकती। अब सवाल यह उठता र्है कि मीडिया में सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर इतनी आलोचनाएं क्यों कर हो रही है। हो सकता है व्यवस्थाओं में थोड़ी कमी रह जाए पर संक्रमित की गंभीर स्थिति खासतौर से डायबिटिज और बीपी की स्थितियां भी काफी कुछ निर्भर करती है तो दूसरी और मरीज को किस स्थिति में अस्पताल में ले जाया गया है यह भी अपने आप में गंभीर है।

देश के मीडिया समूहों ने सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर तो प्रश्न उठाए हैं पर क्या किसी समूह ने खुलकर निजी अस्पतालों में मौत का आंकड़ा या ईलाज पर होने वाले खर्चें के आंकड़ों को उजागर किया है। शायद इसका उत्तर नहीं में ही आएगा। शायद आंकड़ों का अध्ययन किया जाए और सरकारी व गैरसरकारी अस्पतालों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो स्थितियां विपरीत ही होगी। राजस्थान सहित देश के सभी सरकारी सेंटरों पर बेहतरीन व्यवस्थाओं की खुले मन से सराहना की जानी चाहिए। देश में जिस तरह से कोरोना संक्रमितों के मामलें बढ़ते जा रहे हैं उसे देखते हुए मीडिया सहित सभी का सकारात्मक माहौल बनाने का दायित्व भी हो जाता है।

सरकारी व्यवस्थाओं में कमी निकालना आसान होता है क्योंकि वह सीधे आपके निशाने पर आ जाता है पर यदि सही ढंग से आकलन किया जाए तो आरयूएचएस जैसे सरकारी डेडिकेटेड कोविड सेंटर ही आम संक्रमितों के लिए नए जीवन दाता बन रहे हैं। कोरोना के इस नए दौर में सबसे अधिक आवश्यकता है तो सकारात्मक माहौल बनाने की है। यदि सरकारी कोविड सेंटरों के बारे में आम कोरोना संक्रमितों में पोजिटिव सोच विकसित होगी तो आम आदमी इन केन्द्रों पर ही जाने को प्राथमिकता देगा और इसका सीधा सीधा लाभ संक्रमितों को मिलेगा।

जरा विचारणीय व गंभीर यह है कि पहले तो संक्रमण की दहसत और उसके बाद सरकारी केन्द्रों के प्रति नकारात्मक माहौल बनाने से नुकसान किसका हो रहा है। आम आदमी का। साधनहीन आदमी का। वह बेचारा डर के मारे अस्पताल जाने से ही कतराने लगता है। ऐसे में सामाजिक दायित्व बड़ी बात हो जाती है जिसे समझना होगा। दरअसल भयमुक्त वातावरण तैयार करके ही कोरोना के खिलाफ जंग को जीता जा सकता है। क्योंकि वैक्सिन अभी दूर की बात है। सरकार के सख्त कानूनों की अवहेलना आम है।

बाजार खुले हैं तो शादी विवाह के दौर में लापरवाही अधिक ही हो रही है। मास्व्क का किस तरह और कितना उपयोग हो रहा है वह सामने है। योरोप में दिन प्रतिदिन बिगडती स्थितियां सामने हैं। देश में भी नए संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में केवल अवेयर करके ही लोगों को सही और सस्ते ईलाज की सुविधा से लाभान्वित किया जा सकता है।

बेशक कमियों को उजागर किया जाना चाहिए पर आमजन में सरकारी व्यवस्थाओं के प्रति सही सोच भी बनाना हमारा दायित्व हो जाता है ताकि लोग इस कोरोना संक्रमण का सही ईलाज प्राप्त कर सके और ईलाज के नाम पर लुटने से बच सके। जब सरकारी व्यवस्था में जांच लेकर दवाओं तक की उचित व्यवस्था है तो लोगों तक यह जानकारी पहुंचाना हमारा दायित्व हो जाता है। आखिर केन्द्र व राज्य सरकारें किसके लिए इतने प्रयास कर रही है। साफ है आम आदमी के लिए। ऐसे में सकारात्मक भूमिका निभा कर अधिक लाभान्वित किया जा सकता है।



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