इंटरनेशनल गुमराह कंपनी!
| -RN. Feature Desk - Dec 26 2020 12:32PM

-रामविलास जांगिड़

नमस्कार गुमराह सिंह जी! गुमराह सिंह जी ने अपने जीवन में हमेशा ही सही-सच्चे रास्ते चलने वाले लोगों को गुमराह किया है। निश्चित रूप से सही मंजिल की ओर जाने वाले बंदों को इन्होंने भंवर-जाल में उलझाया है। स्वर्णिम राजमार्ग पर चलने वालों को भी चक्रव्यूह में फंसाया है। ऐसे महान भ्रांतिकारी गुमराह सिंह जी आज हमारे स्टूडियो में पधारे हैं। स्वागत है!

बताइए गुमराह जी आपने अपनी जिंदगी में लोगों को भटकाने का धंधा कैसे चुना? जब मैं पैदा हुआ था, तब ही डॉक्टर और नर्स भटक कर सीधे मोर्चरी में पहुंच गए थे। सिजेरियन प्रसव के दौरान ही डॉक्टर ने भटक कर अपना चश्मा, टोपी, कंघा, मोबाइल व रुमाल पेट के अंदर धर दिए थे। तब से ही मुझमें पूरे संसार को भटकाने व गुमराह करने के व्यवसाय को बुलंद करने की आत्म प्रेरणा पैदा हुई।

यह बताइए आप किन-किन क्षेत्रों में गुमराह करने का व्यवसाय कर रहे हैं? गुमराह करने का व्यवसाय हर दिशा में फैलाया है। शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, खेती, किसानी, राजनीति, कानून और न्यूज़ चैनलों तक को भटकाने का धंधा करता हूं। घर-परिवार से देश-दुनिया तक गुमराह करने का एकाधिकार है मेरा! मैंने इंटरनेशनल गुमराह कंपनी खड़ी की है।

यह चीन, अमेरिका, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया से लेकर कुम्हारिया तक के लोगों को गुमराह करने का बिजनेस करती है। सीधे रास्तों से उठाकर लोगों को अंधेरी काली कोठरी में डालना हमारा मुख्य धंधा है। इस धंधे से हमने कई प्लॉट, डॉलर, रिसोर्ट आदि पूरी दुनिया के हर कोने में खड़े किए हैं। हम भटकाते चले जा रहे हैं। हर एक ग्राहक को लटकाते जा रहे हैं। गुमराही की ठेकेदारी का मजा लेते जा रहे हैं।

आपके जीवन का असली मंत्र क्या है? यही कि लोगों को भटकाते रहो, गुमराह करते रहो। उन्हें अंधे कुएं में डालते रहो। हमारा कविता पाठ है- करते रहें सरेआम गुमराह! हम महान भ्रांतिकारी बना। उन्हें भी जंग की परिभाषा समझा देते हैं। जो डोलना चाहते हैं डगमग। जिंदगी से बेपनाह परायों को। हम उनके ही समक्ष बैठे देते रहते हैं, झूठी दिलासाएं। हम कर दें गुमराह!

हर किसी को, कोई भी छद्म इशारा कर। हमसफर के गुमराह में। डुबो देते हैं नया बन। किसी को किनारे कर। छीन कर दीन-दुर्बल की बैसाखियों को। उसे अपाहिज और पक्का बेसहारा कर। गुमराह ही सच्चा भ्रांतिमय अभियान है। गुमराह ही स्वस्थ और भ्रांतिपूर्ण जीवन का मूल मंत्र है। गुमराह पंथ ही सियासी स्वतंत्रता से अधिक महत्त्वपूर्ण है। जय गुमराहमदः गुमराहमिदं गुमराहर्णात् गुमराहमुदच्यते! गुमराहस्य गुमराहमादाय गुमराहमेवावशिष्यते! जय भ्रांति भ्रांति भ्रांति!



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