सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों पर रोक लगाई
| Agency - Jan 12 2021 3:16PM

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इन कानूनों को अब अमल में नहीं लाया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगले आदेश तक हम इन कानूनों पर रोक लगा रहे हैं। इसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से बातचीच के लिए एक कमेटी का गठन का भी ऐलान किया है। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमणयम की पीठ ने कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरीन आज (12 जनवरी) ये अहम आदेश दिया है।

किसान आंदोलन और नए कृषि कानूनों को लेकर सभी पक्षों से बात कर रिपोर्ट देने के लिए सीजेआई एसए बोबडे ने चार सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी और अनिल शेतकारी हैं। मंगलवार को सुनवाई के दौरान वकील एलएम शर्मा ने कहा कि किसान कमेटी के सामने पेश नहीं होंगे।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कमेटी सबकी सुनेगा। जिसे भी इस मुद्दे का समाधान चाहिए वह कमेटी के पास जा सकता है। यह कोई आदेश नहीं जारी करेगी या किसी को सजा नहीं देगी। यह केवल हमें अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। उन्होंने कहा कि हम कमेटी का गठन कर रहे हैं ताकि हमारे पास एक साफ तस्वीर हो। हम यह नहीं सुनना चाहते हैं कि किसान कमिटी के पास नहीं जाएंगे। हम समस्या का समाधान करना चाहते हैं। अगर आप (किसान) अनिश्चितकाल के लिए प्रदर्शन करना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं।

इससे पहले सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के रुख से नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि नए कृषि कानूनों पर फिलहाल रोक लगाई जाए और किसान आंदोलन का हल निकाला जाए। चीफ जस्टिस ने सोमवार को कहा था कि अगर केंद्र सरकार रोक नहीं लगाती है तो अदालत इन नए कृषि कानूनों पर रोक लगाएगी। अदालत ने सोमवार को ही एक कमेटी बनाने की बात कह दी थी, जो सभी पक्षों से बात कर नए कृषि कानूनों को लेकर रिपोर्ट दे।

किसान कर रहे हैं आंदोलन

बता दें कि केंद्र सरकार बीते साल तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं बीते 26 नवंबर से किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। टिकरी, गाजीपुर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर भी किसान लगातार धरना दे रहे हैं। दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों के आने के बाद सरकार और किसान नेताओं में आठ दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है।



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