बालिका बचाओ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन
| - Rainbow News Network - Feb 9 2021 5:15PM

अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2020-21 के अनुपालन में डा0 बब्बू सारंग, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के आदेशानुसार एवं प्रफुल्ल कुमार चौधरी, प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, के निर्देशानुसार 9 फरवरी 2021 को तहसील सभागार, अकबरपुर, अम्बेडकरनगर में बालिका बचाओ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन कोविड-19 महामारी को दृष्टिगत रखते हुए जारी दिशा-निर्देशों के अन्तर्गत किया गया।

    शिविर को सम्बोधित करते हुये विराट मणि त्रिपाठी, न्यायिक मजिस्ट्रेट, जनपद न्यायालय, अम्बेडकरनगर ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि औरतें समाज का बहुत महत्वपूर्ण भाग हैं और पृथ्वी पर जीवन के हर एक पहलू में बराबर भाग लेती हैं हालांकि भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के कारण स्त्रियों के निरन्तर गिरते लिंग अनुपात ने देश में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। इसलिये लिंगानुपात को समान करने के लिये बालिकाओं को बचाना बेहद आवश्यक है। उन्होने लड़का एवं लड़की में भेद-भाव न करने पर बल दिया। उन्होने बताया की यदि अल्ट्रासाउंड मशीन से किसी भी प्रकार की गलत जांच चिकित्सकों द्वारा की जा रही है उसमें जुर्माना एवं सजा दोनो का प्राविधान है एवं बताया कि आज का सभ्य समाज कुरीतियों में घिरता चला जा रहा है। 

       आज के इस टेक्नोलॉजी के युग में बेटियों को भ्रूण में ही समाप्त कर दिया जाता है। टेक्नोलॉजी का उपयोग हमेशा अच्छे कार्यों के लिये होना चाहिये जिससे देश का विकास हो किन्तु आज के समय में इसका उपयोग विध्वंस कार्यों के लिये किया जा रहा है। जिसका परिणाम भविष्य में अत्यंत घातक होने वाला है और यदि समय रहते हम नहीं जागे तो इस विध्वंस से हमें कोई बचा नहीं सकता है। न्यायिक अधिकारी महोदय ने घटते लिंगानुपात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बालिकाओं के लिये समाज में जागरूकता पैदा करने के बावत बल दिया, यदि समाज में जागरूकता पैदा होगी तो भू्रण जांच स्वतः ही बन्द हो जायेगी और लोग लड़के-लड़कियों में फर्क नहीं करेगें। 

    शिविर में बोलते हुये जे0पी0 यादव, तहसीलदार/सचिव, तहसील विधिक सेवा समिति, अकबरपुर अम्बेडकरनगर ने गर्भ में पल रहे शिशु के बारें में बड़े रोचक ढ़ंग से बताया तथा समाज में अल्ट्रासाउण्ड मशीन के जरिये लिंग परीक्षण करने वाले डॉक्टरों के ऊपर गम्भीर कटाक्ष किया। उन्होंने शिविर को सम्बोधित करते हुये बताया कि बालिकाओं के संरक्षण एवं पालन-पोषण में किसी भी तरह का भेद-भाव, आप्राकृतिक व निन्दनीय है। इसके अतिरिक्त उन्होंने गर्भावस्था के दौरान माता एवं होने वाले शिशु के स्वास्थ्य एवं कुपोषण के बारें में भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत में कुपोषण से मरने वाले बच्चों की संख्या अन्य देशों की अपेक्षा अधिक है। 

    सुश्री शालिनी ओझा, महिला कल्याण अधिकारी, अम्बेडकरनगर ने अपने विचार व्यक्त करते हुये बताया कि यदि अवैध रूप से भू्रण जांच के लिये अल्ट्रासाउण्ड मशीन का दुरूपयोग इसी प्रकार होता रहा तो हमारे देश में कन्या शिशु के लिये गम्भीर स्थिति पैदा हो जायेगी। ऐसे केन्द्र/क्लीनिक जहां अल्ट्रा साउण्ड मशीन या इमेजिंग मशीन या स्कैनर या अन्य कोई तकनीकी उपलब्ध है, जिससे गर्भस्थ शिशु का लिंग निर्धारण किया जा सकता है, का पंजीकृत होना अनिवार्य है। स्वेच्छा से लिंग परीक्षण कराने पर महिला के विरूद्ध भी सजा और जुर्माना हो सकता है। शिविर का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता रामचन्द्र वर्मा द्वारा किया गया।         
      इस शिविर में राजीव सिंह अध्यक्ष, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, समिता कुमारी, वंदना वर्मा, गरिमा चौधरी, रंजना वर्मा, बिपिन पटेल, धर्मेंद्र नारायण, अनिल कुमार वर्मा, नरसिंह नारायण तिवारी, सुरेश कुमार वर्मा, गौतम कुमार, रवि चौधरी, अजय कुमार वर्मा, कपिल देव वर्मा, रूपेश यादव, सुनील कुमार त्रिपाठी, प्रीति गुप्ता, किरन, चन्द्रभान सिंह, इशरतुल्लाह, रिम्पू कुमार तथा तहसील के कर्मचारीगण एवं मीडियाकर्मी आदि उपस्थित थे।    
                                                            

 



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