कवि इश्कानंद का इश्किया फंडा!
| -RN. Feature Desk - Feb 12 2021 12:33PM

-रामविलास जांगिड़ 

इश्क कार्ड से नीपजे, इश्क मोल मिल जाय।
मॉल-मॉल बिक रहा, ये डॉलर भाव बिकाय।।

कवि इश्कानंद जी कहते हैं कि इश्क खरीदने-बेचने का, आयात-निर्यात करने का, मोल-भाव करने का सबसे बड़ा व्यापार है। बेरोजगारों का यह सबसे बड़ा हथियार है। मोबाइल इसके लिए सबसे बड़ा औजार है। मोल भाव ही जीवन का असली सार है। सच्चे इश्क का यही व्यवहार है। अब यह गली मोहल्ले से लेकर बड़े-बड़े मॉल में बिकता है। अब यह रुपयों में नहीं बल्कि डॉलर के भाव मिलता है। इसलिए इश्किया सज्जन इसे खरीदने में ही अपना दांव-पेंच दिखाते हैं। यह कार्ड, फूल, टेडी बियर, परफ्यूम से लेकर नाना प्रकार के फार्म हाउस, कोठी, बंगला, एंड्राइड मोबाइल फोन आदि में खरीदा-बेचा जाता है।

इश्क बार-बार कीजिए, दस-बीसों एक साथ।
कपट सवारथ मन बसे, हे फेकबुकिया नाथ।।

कवि कहता है कि इश्क बार-बार करते रहना चाहिए। यह एक ऐसी चीज नहीं है, जो एक ही बंदे के साथ सात जन्मों का साथ निभाने की बात हो। कवि इश्कानंद ऐसे बंधन से मुक्ति दिलाते हुए कहते हैं कि वास्तव में इश्क दस-बीस-पचासों के संग एक साथ करते रहना चाहिए। आशय यह है कि जितने ज्यादा इश्कार्थियों से इश्क की धाराएं चलेगी उतना ही ज्यादा फायदा रहेगा। इश्क करते समय स्वार्थ, अनीति और कपट हमेशा मन में रखना चाहिए। वैलेंटाइन काल में यही इश्क के आधार तत्व है। फेकबुक में इश्क को एक व्यापार के रूप में प्रयोग करने के लिए फेकबुक नाथ का बारंबार स्मरण करना चाहिए।

इश्क ताहि से कीजिए, जो धन माल लुटाय।
डेट-चैट गिफ्ट-शिफ्ट, जो तगड़ा रेट दे जाय।।

कवि बार-बार स्पष्ट करते हैं कि इश्क उसी से करना चाहिए जो धन-माल लुटाने के लिए तत्पर हो। डेटिंग, चैटिंग, गिफ्ट आदि दान-पुण्य करने वाले को ही लिफ्ट देकर उन्हें अपनी ओर शिफ्ट करना चाहिए। इश्क को प्राइवेट, सरकारी और अर्द्ध सरकारी मंडियों में सरेआम नीलाम करना चाहिए। इश्क को अधिकतम समर्थन मूल्य पर ही नीलाम करना चाहिए। इस नीलामी में जो तगड़ी रेट दे उससे तत्काल इश्क फरमा देना चाहिए।

तू नहीं कोई और सही, और ढूंढ़िए चहूं ओर।
गली नहीं सिक्स लेन है, ये इश्क मचाए शोर।।
 

इश्क का मैसेंजर हर दिशा में चक्कर काटता रहता है। एक समझदार इश्कबाज एक के भरोसे न रहकर, उसकी उपस्थिति में ही किसी दूसरे से इश्कबाजी लड़ाता है। दूसरा नहीं मिलने पर इश्क के कबूतर संग 15वीं चिट्ठी 50 वे बंदे के हाथ में थमा देता है। यही इश्क की सार्थक नीति है। समकालीन राजनीति में तो इसी का बोलबाला है। नये सामाजिक ताने-बाने में यही सब होता है।

नए जमाने का इश्क संकरी गली में से निकल कर सिक्स लेन के चमचमाते हाईवे पर आ गया है। यहां नाना प्रकार के इश्किया जी अपनी गाड़ी बड़े मजे से चला रहे हैं। ऐसा इश्किया शोर हर दिशा में फैला-पसरा है। अत: वैलेंटाइन के इस इंटरनेशनल इश्क मार्केट में मनचाहा इश्क खरीद-बेच लेना चाहिए। यही असली समझदारी है। यही कवि इश्कानंद का इश्किया फंडा है।



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