किशोर न्याय एवं लैंगिक न्याय विषयक विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन
| Agency - Feb 18 2021 3:18PM

अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2020-21 के अनुपालन में डा0 बब्बू सारंग, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के आदेशानुसार एवं श्री अशोक कुमार-ग्प्प् प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, के निर्देशानुसार आज दिनांक 17.02.2021 को पुलिस लाइन्स, अकबरपुर, अम्बेडकरनगर में किशोर न्याय एवं लैंगिक न्याय विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन कोविड-19 महामारी को दृष्टिगत रखते हुए जारी दिशा-निर्देशों के अन्तर्गत किया गया।

      शिविर को सम्बोधित करते हुये विराट मणि त्रिपाठी, न्यायिक मजिस्ट्रेट, जनपद न्यायालय, अम्बेडकरनगर ने बताया कि जब किसी बच्चे द्वारा कोई कानून-विरोधी या समाज विरोधी कार्य किया जाता है तो उसे किशोर अपराध या बाल अपराध कहते हैं। कानूनी दृष्टिकोण से बाल अपराध 8 वर्ष से अधिक तथा 16 वर्ष से कम आयु के बालक द्वारा किया गया कानूनी विरोधी कार्य है जिसे कानूनी कार्यवाही के लिये बाल न्यायालय के समक्ष उपस्थित किया जाता है। भारत में किशोर न्याय अधिनियम 1986 (संशोधित 2000) के अनुसर 16 वर्ष तक की आयु के लड़कों एवं 18 वर्ष तक की आयु की लड़कियों के अपराध करने पर बाल अपराधी की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है। बाल अपराध की अधिकतम आयु सीमा अलग-अलग राज्यों मे अलग-अलग है। इस आधार पर किसी भी राज्य द्वारा निर्धारित आयु सीमा के अन्तर्गत बालक द्वारा किया गया कानूनी विरोधी कार्य बाल अपराध है।    

      लैंगिक न्याय विषय पर न्यायिक अधिकारी महोदय द्वारा बताया गया कि लैंगिक असमानता का तात्पर्य लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव से है। परंपरागत रूप से समाज में महिलाओं को कमजोर वर्ग के रूप में देखा जाता था। वे घर और समाज दोनों जगहों पर प्रायः भेदभाव की शिकार होती थी वर्तमान मे सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं’, ‘वन स्टॉप सेंटर योजना’, ‘महिला हेल्पलाइन योजना’ और ‘महिला शक्ति केंद्र’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तीकरण का प्रयास किया जा रहा है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप लिंगानुपात और लड़कियों के शैक्षिक नामांकन में प्रगति देखी जा रही है।आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हेतु मुद्रा और अन्य महिला केंद्रित योजनाएँ चलाई जा रही हैं।

      शिविर में बोलते हुये श्री टी0एन0 द्विवेदी, प्रतिसार निरीक्षक, पुलिस लाइन्स, अम्बेडकरनगर ने बताया कि किशोर अपराधियों को विशेष सुविधा देने और न्याय की उचित प्रणाली अपनाने के लिये किशोर-अधिनियम बनाए गए है। भारत मे बच्चों की सुरक्षा के लिए 20वीं सदी की दूसरी दशाब्दी में कई कानून बनें सन् 1860 में भारतीय दण्ड संहिता के भाग 399 व 562 में बाल अपराधियों को जेल के स्थान पर रिफोमेट्रीज में भेजने का प्रावधान किया गया। दण्ड विधान के इतिहास में पहली बार यह स्वीकार किया कि बच्चों को दण्ड देने के बजाच उनमें सुधार किया जाए एवं उन्हें युवा अपराधियों से पृथक रखा जाए। 

    शिविर का संचालन श्रीमती रूकमणि वर्मा, क्षेत्राधिकारी भीटी द्वारा किया गया। इस शिविर में राजीव सिंह, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, श्रीमती आशा सिंह, गुड्डू राम, नीरज कुमार, शिव कुमार, संजय कुमार सिंह, रमेश शुक्ल, जयकरन सिंह, नरसिंह, रणजीत सिंह,  प्रदीप कुमार सिंह, पवन कुमार, मनोज सिंह, दिनेश चन्द्र मिश्र, राहुल कुमार सिंह, अनुराग मौर्य, आदित्य मौर्य, अजयदीप सिंह, अमित कुमार वर्मा, सौरभ कुमार, इशरतुल्लाह, रिम्पु कुमार तथा पुलिस लाईन के कर्मचारीगण एवं मीडियाकर्मी आदि उपस्थित थे।                             



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