सरेआम बिक जाएं इस ठंडी में!
| -RN. Feature Desk - Feb 19 2021 2:46PM

-रामविलास जांगिड़ 

इन दिनों नीलामी चल रही है। बिकने-खरीदने का एक महा सीजन चल रहा है। अच्छे-अच्छे खिलाड़ी करोड़ों में बिक रहे हैं। सरेआम बिक रहे हैं। बिक-कर अपनी तकदीर खुद लिख रहे हैं। आज के जमाने में मनुष्य जन्म ही इसलिए लेता है कि वह किसी खास भाव में बिक जाए। हर एक बंदा बिकने के लिए तैयार बैठा है। हर एक साहित्यकार बिका हुआ है, तो हर एक व्यापारी भी खुद बिका हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता तो बिकने के मामले में बहुत तेज हैं। वे अपना अच्छा-खासा मोल वसूल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मार्केट में इनकी भारी डिमांड है। आंदोलन के समय तो इनकी मांग पूर्ति करना ही संभव नहीं है। और तो और खरीदार खुद बिके हुए नजर आते हैं। नेता इस मामले में ज्यादा तेज हैं। वे बारह महीने चौबीसों घंटे, हर मौसम में बिकते रहते हैं। जब चुनाव हो तब इनका भाव आसमान छूने लग जाता है। वे अपनी मनचाही कीमत वसूलते हैं। ये अपनी कीमत कैश-काइंड के साथ ही कार, कोठी, कन्या, कंचन आदि में भी वसूलते हैं। नेता मंडी में नेताओं के अपने-अपने भाव है। हर एक रंग डिजाइन और पैटर्न में नेता उपलब्ध है। 

आज नेता की हर किसी को जरूरत होती है। अपने घर के सामने की नाली साफ करवाना हो या नया कारखाना डलवाना हो। मुंह पर मास्क लगाना हो या किसी पर कफन डलवाना हो। इन सबमें नेता की जरूरत होती है। हर एक बंदा अपने-अपने ढंग का नेता खरीद कर अपने पेंट की पिछली जेब में धरे रखता है। एक अदना सा चपरासी भी अपनी जेब में एक अच्छा खासा नेता रखता है। हर एक शिक्षक की जेब में शिक्षा नेता होता है, तो हर एक बस ड्राइवर के पास परिवहन नेता! हर एक नर्स अपनी जेब में चिकित्सा नेता को धरे रखती है, तो हर एक झुग्गी माफिया विकास नेता को जेब में लिए डोलता है। हर एक नेता बिका हुआ है और बिकना भी चाहिए!

इस संसार में जो नेता बिका हुआ नहीं होता है, उसे सब हेय दृष्टि से देखते हैं। जब चुनाव आते हैं तो इस व्यवसाय में उतरने के लिए नेता लाखों-करोड़ों का व्यापार लगाता है। उसकी लागत निकालने के लिए उसे बिकना ही चाहिए। बिन बिके सब सून! कभी-कभी कोई नेता 1 दिन में पचास-साठ बार भी बिक जाता है। बिकने की अपनी अलग-अलग दर है। जैसे पेट्रोल-डीजल के भाव में हर दिन हर क्षण बढ़ोतरी होती है, वैसे ही नेता के बिकने-बिकाने के भाव हर दिन, हर क्षण बढ़ते रहते हैं।

हर एक बंदे के पास अपने-अपने ढंग का नेता होता ही है। कई लोग तो अपने साथ कई तरह के नेता रखते हैं। कुछ लोग तो इतने जोरदार होते हैं कि वे दो-तीन अलग-अलग विरोधी पार्टियों के नेताओं को भी खरीद कर अपने घर के खूंटे से बांध देते हैं, जैसे उसके घर में कई भैंसें बंधी हो। जैसे भैंस का दूध निकालते हैं, वैसे ही लोग खरीदे हुए नेता का लगातार दोहन करते रहते हैं। इसे वे अपने साथ फोटो में लगाकर भी रखते हैं। अपना व्यवसाय करते समय वही फोटो दिखा कर लोग अपना उल्लू सीधा करते हैं। मजेदार बात यह है कि कई बार वे दूसरों का उल्लू टेढ़ा करने में भी इसी खरीदे गए नेता का उपयोग करते हैं। चलो चलें किसी मंडी में, सरेआम बिक जाएं इस ठंडी में!



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