अंतरराष्ट्रीय रद्दी न्यास कार्यक्रम!
| -RN. Feature Desk - Feb 22 2021 12:44PM

-रामविलास जांगिड़ 

घर में नाना प्रकार की रद्दी पसरी पड़ी है। जिस किसी ताक में हाथ डालता हूं, कोई ना कोई रद्दी डंक मार देती है। एक दिन मेरा इंतजार खत्म हुआ। रद्दी वाले को देखते ही मेरी बाछें इस प्रकार खिल गई जैसे दलाल देखते ही चमचे की खिल जाती हो। मैंने परिवार में एक गृहमंत्री की तरह आपात बैठक बुलाई। तुरत-फुरत में राष्ट्रीय रद्दी आयोग का गठन किया। अंतरराष्ट्रीय रद्दी न्यास कार्यक्रम के लिए गहन मंत्रणा शुरू की गई। बाहर रद्दी वाला आपने कांटे बांट इस तरह संभाल रहा था, जैसे वह किसी सियासी पार्टी का अध्यक्ष हो। कांटा मारने के लिए कांटे को तैयार करता! इधर रद्दी आयोग के सदस्यों ने वोट डालकर अपना निर्णय प्रस्तुत किया। जोड़-तोड़ से निर्णय हुआ कि तत्काल प्रभाव से समस्त प्रकार की रद्दियों को घर से बाहर निकालना चाहिए।

सामूहिक सदस्यों ने, सामूहिक सहयोग से, सामूहिक रद्दियों को एक-एक करके बाहर निकाला। थोड़ी देर में ही हम रद्दी के ढेर में जाने कहां खो गए। रद्दी वाले ने अंतरराष्ट्रीय आपदा पुलिस की मदद से हमें खोजने का अभियान चलाया। घर,गली, मोहल्ले में आपातकाल पसर गया। रद्दी के बीच हमारी खोजबीन की गई। वैसे मोहल्ले वालों का सभी सज्जनों कहना था कि हमें ढूंढ़ने की कोई जरूरत नहीं है, और हम स्वयं साक्षात एक रद्दी मात्र हैं। लिहाजा हमें भी रद्दी के साथ खरीद लेना चाहिए। हमें भी रद्दी के साथ बिकना अच्छा लगा। चलो कहीं तो हम बिक सके! कमबख्त रद्दी वाले ने हमें रद्दी मानने से यह कहकर मना कर दिया कि हम रद्दी से भी गए गुजरे कचरा मात्र हैं। रद्दी के ढेर में हमें ढूंढ़ने के लिए मोहल्ले के कुछ शातिर कुत्ते भी लग गए। एक कुत्ते ने आखिर हमें खोज ही डाला। 

इधर तरह-तरह के रंग आकार में, तरह-तरह की रद्दियां डांस कर रही थी। रद्दी के लिए मोलभाव किया गया। रद्दी वाले ने 5 रुपए किलोग्राम के मोल से रद्दी खरीदने का कार्यादेश जारी किया। नीति और ज्ञान की किताबें 5 रुपए किलोग्राम, तो सियासी पार्टी की उपलब्धि वाले ब्रोशर 4 रुपए किलोग्राम खरीदने का मोल किया। किसी सियासी पार्टी की उपलब्धियों का वर्णन करने वाली रंगीन आकर्षक किताबों को 3 रुपए किलोग्राम में खरीदने का मोल भाव हुआ। मैंने जब काफी हील-हुज्जत की तो भी रद्दी वाला काबू में नहीं आया। फिर उसने सियासी पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र तो खरीदने से एकदम मना कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र तो एकदम कचरा माल है, और मैं इन्हें नहीं खरीद सकता।

मैंने रद्दी वाले से ये घोषणा पत्र 2 रुपए किलोग्राम खरीदने के लिए बहुत माथापच्ची की। लेकिन कबाड़-सुखी ने साफ इंकार कर दिया। मुझसे कहा- 'जिस ट्रक में गलती से मेरे बेटे ने चुनावी घोषणा पत्र खरीद कर डाल दिए थे, इससे मेरे ट्रक के टायर तक फट गए। तुम इन चुनावी घोषणा पत्रों, आश्वासन पत्रों, वादा पत्रों, संकल्प पत्रों आदि को मुझसे खरीद लो। मैं तुम्हें उल्टे इन्हें खरीदने के बदले माल भी दूंगा और प्रति किलो के भाव से 5 रुपए अलग से! रद्दी वाले की यह बात सुनकर हमारे घर का अंतरराष्ट्रीय रद्दी आयोग गश खाकर जमीन पर गिर पड़ा। तभी चुनावी घोषणा पत्रों से भरे ट्रक में विस्फोट हुआ और उसके परखच्चे उड़ गए। पता नहीं शिलान्यास था या रद्दी न्यास!



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