जा तेल उसे मार!
| -RN. Feature Desk - Feb 23 2021 1:08PM

-रामविलास जांगिड़

कहावतों में मार गप्पड़-बाजी चल रही है। कहावत है- 'आ बैल मुझे मार!' कहावतें अपडेट करनी चाहिए। पहले बैलगाड़ी होती थी। उसमें जुते बैल अपने सींग किसी पर भी उठाने के लिए उतावले होते थे। बैल धारक अपना बैल हर किसी पर खुला छोड़ देता था। अब बैल भी नहीं रहे और न रही बैलगाड़ियां! अब तेल आ गया है और सीन पर मौजूद है तेलगाड़ियां! सड़क के दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर तेलगाड़ियां फंसी पड़ी है।

तेल धारक अब तेल को खुला छोड़ रहे हैं। गाड़ियों में जुता हुआ तेल मचल रहा है। तेरा तेल, मेरा तेल। केंद्र का तेल, राज्य का तेल। सबका एक ही मेल। चलो करें तेल का खेल! मची तेल की महासेल! कहावत अब होनी चाहिए- 'जा तेल उसे मार!' गला दबाकर, धीरे-धीरे कर वार! स्कूटर फांसी खाकर पेड़ पर लटका है। मोटरसाइकिल छत से छलांग लगाने के लिए तैयार है। कार खींचने के लिए ऊंट बेकरार है।

बड़ी-बड़ी कंपनियों ने तेल के लिए लोन देने का नया बिजनेस शुरू कर दिया है। प्यार की है ये सब कहानी 3.0, नमक का इश्क है बड़ा पुराना 2.0, सारा किस्सा है इसी रात का 4.0, नाऊ मे आई कम इन भाभीजी 3.0 आदि टीवी धमालिया सीरियल में चौथी प्रेमिका पांचवें प्रेमी को पटाने के लिए 100 मिलीलीटर पेट्रोल का वादा कर रही है। रुपए बचाने के चक्कर में वह पेट्रोल की जगह है डीजल ले जा रही है। सीन चकाचक जारी है।

फेरे में भी तेल की बीमारी है। शादी में पंडित जी दूल्हे को पूछ रहे हैं- अगर तुम्हारी पत्नीव्रती नार तुमसे पेट्रोल की मांग करे, तो क्या तुम इस मांग को पूरी कर पाओगे? अगर ये मांग पूरी कर सकते हो, तो वाम अंग में आओ। वरना सीधे अपने घर जाओ। जा तेल उसे मार! तभी टीवी वाली खबरी बाई ने खबर दी पेट्रोल तीन पैसे और डीजल दो पैसे सस्ता हो गया है। ये अलौकिक समाचार सुनकर तीनों लोकों में पुष्पों की घनघोर वर्षा हुई।

समस्त नर, नारी, किन्नर, गन्धर्व, सुर, असुर, देवी, देवता, यक्ष, नाग, राग आदि प्रसन्न हुए। उन्होंने अपने घोड़े, बैल, हाथी, उल्लू, तीतर आदि की सवारी छोड़कर अपनी-अपनी कारें बाहर निकाल ली। टीवी माता पर फिर एक दिव्य-ज्योति प्रज्ज्वलित हुई है। बाई टीवी आगे भी सृष्टि के कल्याण हेतु ऐसे समाचार देती रहे, इसी मंगल कामना के साथ तीनों लोकों के प्राणियों ने अपनी-अपनी कारों का धुआं सूरज पर फेंक दिया।

तेल देख और देख तेल की धार देख। अक्कड़-बक्कड़ मत गिन फक्कड़, अब सौ की पूरी वार देख। ऊंट चला है मस्ती से, पीछे बंधी ये कार देख। जनता का तेल निकाले, बिन नैया पतवार देख। जा तेल उसे मार, कर दे उसका बंटाढ़ार। गोबर बैठा करे पुकार, मत ले झुनिया काली कार! आज रात को गोबर झुनिया के साथ गया तो ऐसा कांप रहा था, जैसे वह कहीं से दो बूंद पेट्रोल चुरा लाया हो।

गोबर मन ही मन तेलियाने लगा- झुनिया को देखते ही सारी लेक फ्रंट सिटी अपार्टमेंट में कोहराम मच जायगा। लोग चारों ओर से कैसी हाय-हाय मचाएंगे, धनिया कितनी गालियां देगी, ये सोच-सोचके उसके पांव पीछे रह जाते थे। गोबर आज फिर खाली कैन लाया। उसके पास पेट्रोल की एक बूंद भी न थी!' उसने जैसे-तैसे एक हल्की सी सांस ली। सामने खड़ा बूढ़ा स्कूटर अपनी आखरी सांस लेता दिखाई पड़ा।



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