नया औद्योगिक निवेश आएगा तो बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
| -RN. Feature Desk - Feb 25 2021 4:37PM

-डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सबसे लंबे बजट भाषण का रिकार्ड बनाते हुए अपने बजट भाषण में कोरोना प्रभावित उद्योग जगत को बड़ी राहत देने का प्रयास किया है। कोरोना के कारण प्रभावित प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का ठोस विजन प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बजट प्रस्तावों में एक और नई एमएसएमई पाॅलिसी लाने की बात की है तो दूसरी और प्रदेश में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव किए है। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2019 का दायरा बढ़ाते हुए हेल्थ केयर को ट्रस्ट क्षेत्र के रुप में शामिल करने के साथ ही अनुसूचित जाति, जनजाति उद्यमियों को आगे लाने के लिए डाॅ. बीआर अंबेड़कर एससीएसटी उद्यमी प्रोत्साहन योजना लागू करते हुए रिप्स, 2019 में लाभ देने के प्रावधान किए हैं।

आदिवासी जिलो के औद्योगिक विकास के लिए रिप्स योजना का दायरा बढ़ाया गया है तो पुरानी रिप्स योजना की अवधि बढ़ाकर लाभार्थियों को राहत दी है। भिवाडी औद्योगिक क्षेत्र का दायरा बढ़ाते खुशकेेड़ा, भिवाड़ी, नीमराणा और टपूकड़ा को शामिल करते हुए ग्रेटर भिवाडी इण्डस्ट्रीयल टाउनशिप विकसित करने के लिए एक हजार करोड़ का प्रावधान किया है। इसी तरह से मारवाड़ इण्डस्ट्रीयल कलस्टर बनाना प्रस्तावित है। युवाओं को ऋण, बुनकरों को 3 लाख तक का ब्याजमुक्त ऋण, मेगा व मिनी फूड पार्कौं बनाने, स्टार्टअप्स को सहयोग देने के प्रावधान कर बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की दिषा दी है।

दरअसल औद्योगिक निवेश की दृृष्टि से राजस्थान की और आज निवेशक रुख कर रहे हैं। पिछले सालों मेें राजस्थान में निवेश भी बढ़ा है और राज्य सरकार द्वारा निरीक्षण राज खत्म कर एमएसएमई एक्ट के सरलीकरण और वन स्टाॅप शाॅप जैसी व्यवस्थाएं निश्चित रुप से निवेशकों को आकर्षित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। इसके साथ ही राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना मेें विशेष रियायतें और अब उसका दायरा बढ़ाकर उद्यमियों को आकर्षित करने से नए उद्यम लगेंगे। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग अर्थ व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार एमएसएमई उद्योग ही उपलब्ध कराते हैं।

राज्य में सरकार आने के बाद जिस तरह से औद्योगिक निवेश का वातावरण का प्रयास किया गया है उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि निरीक्षणों व अनुमतियों से तीन साल से मुक्त करने का सकारात्मक असर रहा है। उद्यमी एमएसएमई पोर्टल पर आगे आ भी रहे हैं। निवेशकों को आकर्षित कर धरातल पर उद्यमों की स्थापना बड़ी बात है। हांलाकि मुख्यमंत्री गहलोत ने बजट पेश करते हुए राजस्थान फाउण्डेशन के माध्यम से देश-विदेश में रोड़ शो आयोजित करने की बात कही हैं वहीं राजस्थान इंवेस्टर्स समिट के आयोजन का प्रस्ताव किया है। निश्चित रुप से यह अच्छी सोच है।

अब देखना यह होगा की सरकारी मशीनरी इन आयोजनों को कहां तक ले जाती है और नए निवेशकों को राजस्थान की यूएसपी से प्रभावित करने में सफल होती है यह भविष्य के गर्भ में छिपा है। समिट व रोड शो के आयोजन में सतर्कता भी बरतनी होगी ताकि पूर्व के आयोजनों की तरह अपने उददेश्यों से यह आयोजन भटक नहीं जाए। आशा की जानी चाहिए कि लंबे समय से धरातल पर उतरने से तरस रही दिल्ली मुबई इण्डस्ट्रीयल कोरिडोर परियोजना एक हजार करोड़ रु. से विकसित होने वाला गेटर भिवाड़ी इण्डस्ट्रीयल टाउनशिप और 500 करोड़ रु. की लागत से विकसित होने वाला मारवाड़ इण्डस्ट्रीयल कलस्टर धरातल पर आ सकेगी।

देखा जाए तो डीएमआईसी परियोजना औद्योगिक विकास के लिए गेम चेंजर परियोजना है और इसके क्रियान्वयन से औद्योगिक विकास के साथ ही रोजगार के अवसरों का अंबार ही लग जाएगा। इसी तरह से एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडियंट्स से जुड़े विनिर्माण क्षेत्र को रिप्स के दायरें में लाते हुए अतिरिक्त परिलाभ देने से फार्मास्यूटिकल सेक्टर में निवेष बढ़ेगा। राज्य में उपखण्ड स्तर पर 64 औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की घोषणा से समग्र औद्योगिक विकास संभव हो सकेगा अन्यथा कुछ क्षेत्र विशेष तक ही उद्यमों के विकास से संपूर्ण राजस्थान का संतुलित औद्योगिक विकास नहीं हो पाता है। जयपुर को फिनटेक सिटी बनाने की अच्छी पहल होगी।

जयपुर के राजस्थान हाट को दिल्ली हाट के तर्ज पर विकसित करने का प्रस्ताव आज समय की मांग व आवश्यकता है। इसका कारण भी है। जयपुर पर्यटन की दृष्टि से प्रमुख डेस्टिनेशन होने से दस्तकारों, बुनकरों, हस्तशिल्पियों को नई पहचान मिल सकेगी। जहां तक मुख्यमंत्री लघु उद्यम प्रोत्साहन योजना को दस साल तक लागू रखने, 50 करोड़ के अनुदान का प्रावधान, स्टार्टअप्स को 5 लाख तक की सीडमनी, उनकों प्राथमिकता से कार्य देने, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए प्रावधान किए गए हैं।

देखा जाए तो पिछला लगभग एक साल कोरोना से प्रभावित रहा है। लंबे लाॅकडाउन के दौर के कारण औद्योगिक गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित रही है। उद्योगों के सामने दिक्कते आई है तो रोजगार के अवसर कम हुए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिस तरह के बजट प्रस्ताव रखे हैं उनसे निश्चित रुप से निवेश को बढ़ावा मिलेगा वहीं फार्मास्यूटिकल और बायोफार्मा सेक्टर में नए उद्योग लग सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह कि डीएमआईसी परियोजना को राजस्थान में अमली जामा पहनाने के लिए कदम बढ़ाते हुए गे्रटर भिवाडी टाउनशिप और मारवाड़ कलस्टर धरातल पर आ जाता है तो प्रदेश का औद्योगिक सिनेरियों ही बदल जाएगा। स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत ग्रेटर भिवाडी इण्डस्ट्रीयल टाउनशिप को औद्योगिक विकास की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होना मान रहे हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत नेे समन्वित, संतुलित और समग्र औद्योगिक विकास के लिए नए निवेश और युवाओं के लिए रोजगार दोनों से जुड़े अधिकांश बिन्दुओं को अपने बजट प्रस्तावों में प्रभावी तरीके से रखा है। अब इन प्रस्तावों को अमली जामा महनाने की जिम्मेदारी सरकारी मशीनरी पर आ जाती है। यदि समयवद्ध कार्य योजना बनाकर क्रियान्विति के प्रयास किए जाते हैं तो प्रदेश के औद्योगिक विकास को दिशा मिल सकेगी। होना तो यह चाहिए कि नए वित्तीय वर्ष के शुरु होने से पहले आवश्यक सभी औपचारिकताएं पूरी कर एक अप्रेल से अमली जामा पहनाने का काम आरंभ हो जाता है तो घोषणाएं घोषणाएं ना रहकर वास्तविकता में धरातल पर आ सकेगी।



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