अम्बेडकरनगर सी.एम.ओ. कार्यालय के चर्चित बाबू पंकज अग्रहरि के सम्पत्तियों के जाँच की मांग.....
| - Rainbow News Network - Feb 25 2021 5:00PM

बाह्य जनपद स्थानान्तरण के बावजूद जमे हैं अपने स्थान पर, स्वास्थ्य सेवा के 21वें वर्ष में इन्हें मिली प्रोन्नति

जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. का ध्यान कराया गया है आकृष्ट

अम्बेडकरनगर। आजकल जब से 32वें जिलाधिकारी के रूप में युवा आई.ए.एस. सैमुअल पॉल एन. ने यहाँ की कमान अपने हाथ में लिया है तब से हर आम खास की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लोगों ने मीडिया, सोशल मीडिया के जरिये अपनी-अपनी परेशानियाँ खुले रूप से जिलाधिकारी के संज्ञान में लाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा राजकीय विभागीय कार्यालयों के अधिकारियों व कर्मचारियों के मनमानापन, भ्रष्टाचार से त्रस्त लोग भी जिलाधिकारी के समक्ष अब खुलकर आने लगे हैं। उन्हें यह उम्मीद है कि सैमुअल पॉल एन. अपनी कार्यशैली के अनुसार उनकी परेशानियों की तरफ गम्भीरतापूर्वक ध्यान देंगे और समस्या समाधान भी करेंगे। 

इसी क्रम में लोगों ने सोशल मीडिया के जरिये कई राजकीय विभागीय कर्मचारियों के मनमाने रवैय्ये का बखूबी चित्रण कर युवा आई.ए.एस. से जस्टिस की मांग किया है। जिले के एक वरिष्ठ पत्रकार जो एक हिन्दी साप्ताहिक के सम्पादक हैं ने मुख्य चिकित्साधिकारी अम्बेडकरनगर कार्यालय में दो दशक से अधिक अवधि से जमे अंगद का पाँव बने एक लिपिक के बारे में लिखते हुए जिलाधिकारी का आकृष्ट कराया है और मांग किया है कि उक्त बाबू के बारे में तटस्थ एजेन्सी से जाँच कराई जायेगी और विभाग में उनका पटल परिवर्तन करने के साथ ही यहाँ से स्थानान्तरण किया जायेगा। 

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मेला के नाम से प्रख्यात हिन्दी साप्ताहिक मीडिया गाँव के सम्पादक हैं ने सी.एम.ओ. कार्यालय के चर्चित बाबू पंकज अग्रहरि के बारे में लिखा है कि जब से जिला बना है तभी से नियुक्त यह कर्मचारी हेरा-फेरी का मालिक बना बैठा है। कहने को तो पंकज अग्रहरि यानि पंकज बाबू क्लर्क हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों पर इनका दबदबा कायम है। इनके बारे में कहा जाता है कि ये विभाग में क्लर्क नहीं एडिशनल सी.एम.ओ. की हैसियत पर हैं। सभी बिगड़े काम पंकज बाबू चुटकियों में बना देते हैं। इस स्थापना बाबू का स्थानान्तरण स्वास्थ्य विभाग में ही अन्यत्र जिले के निकटवर्ती जनपद में हो चुका है बावजूद इसके पंकज बाबू अपने प्रभाव से सी.एम.ओ. कार्यालय में जमे हुए हैं। 

डॉ. मेला ने लिखा है कि अम्बेडकरनगर के विभागों के अनेकों अधिकारी कर्मचारी अब तक स्थानान्तरित किए जा चुके हैं। अनेकों जिलाधिकारियों की आमद और रवानगी हो चुकी है मगर सी.एम.ओ. कार्यालय के बाबू पंकज अग्रहरि अपनी जगह चीन की दीवार बनकर अब तक खड़े हैं। डॉ. मेला के अलावा अन्य कइयों ने कहा कि पंकज अग्रहरि कई बड़े ब्राण्ड के धाकड़ प्रभावशाली पत्रकारों, मीडिया परसन्स के खास हैं। स्थानीय और क्षेत्रीय माफिया से इनकी साठ-गांठ है। बड़े-बड़े दबंग बाहुबली ठेकेदार इनके हमप्याला व हमनिवाला हैं। यही सब कारण है कि स्वास्थ्य विभाग का उच्चाधिकारी भी इनका विरोध नहीं कर सकता है। इनके बारे में यह भी कहा जाता है कि पंकज बाबू एक मदारी हैं, और स्वास्थ्य विभाग के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी/कर्मचारी इनके हाथ की कठपुतली।

इनके बारे में सूत्रों से पता चला है कि ठेकेदारों के टेण्डर्स और ठेकों से मिलने वाली कमीशन धनराशि के रूप में इनकी लाखों रूपए की व्यक्तिगत आमदनी है। विभाग में आउट सोर्सिंग एवं संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों पर मेहरबान कहे जाने वाले पंकज बाबू का एक छत्र राज कायम है। विभाग में दवाओं से लेकर छोटे से बड़े उपकरणों एवं अस्पतालों के बेड, बेड शीट्स, गद्दे, अन्य फर्नीचर, मास्क, सैनिटाइजर आदि की खरीद में इनके द्वारा लाखों रूपए की कमीशनखोरी किया जाना चर्चा का विषय है। यहाँ के स्वास्थ्य महकमे में चिकित्सकों एवं अन्य कर्मियों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराये जाने वाले (सम्बद्ध/अटैच) वाहन/भार वाहन इस तरह के सभी प्रकार के कार्य इन्हीं के द्वारा सम्पादित व निष्पादित किए जाते हैं। 

विभाग में कराये जा रहे निर्माण कार्यों, दवा व उपकरण खरीद हेतु निकाली गई सूचना गुप्त तरीके से इनके द्वारा ऐसे समाचार-पत्रों में प्रकाशित करवाई जाती हैं जिनका प्रसार इस जनपद में नहीं होता है। गुप्त तरीके से प्रकाशित लाखों/करोड़ो की निविदा सूचनाएँ इनके चहेतों व विभाग के उच्चाधिकारियों तक की ही जानकारी में रहती है। सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवा अवधि के पिछले ढाई दशक से इनके द्वारा अवैध तरीके से अकूत सम्पत्ति अर्जित की गई है। जिसमें चल-अचल, नामी-बेनामी सम्पत्तियाँ, कई छोटे-बड़े उद्योग, महंगे भूखण्ड, लग्जरी गाड़ियाँ, सुख-सुविधा युक्त आवासीय भवन शामिल हैं। कोरोना संकट काल जहाँ हर आम खास के लिए मुसीबत बना रहा वहीं पंकज अग्रहरि के लिए यह दौर पैसा कमाने का सबसे बेहतरीन अवसर रहा। इस अवधि में इन्होंने मास्क, बेड शीट्स के निर्माण क्षेत्र में कदम रखा और मनमाने तरीके से उसकी आपूर्ति स्वास्थ्य महकमे को की।  

पत्रकार और प्रबुद्धवर्गीय जनों ने जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. से दरख्वास्त किया है कि जनपद सृजन (1995) के बाद से लगातार स्वास्थ्य विभाग में जमे सी.एम.ओ. ऑफिस के बहुचर्चित बाबू पंकज अग्रहरि को उनके वर्तमान स्थान से स्थानान्तरित किया जाये। बेहतर यह होगा कि जिस जनपद के लिए उनका स्थानान्तरण हुआ है यथा शीघ्र वहाँ के लिए इनको रिलीव किया जाये। पंकज बाबू के स्वयं एवं रिश्तेदारों के नामी-बेनामी सम्पत्तियों के जाँच की मांग भी जोरदार ढंग से की जा रही है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 21वें वर्ष (2021 की शुरूआत में) में पंकज अग्रहरि की प्रोन्नति हुई है। इससे प्रतीत होता है कि पंकज अग्रहरि एक सर्वाधिक पहुँच वाले धनबली स्वास्थ्य कर्मचारी हैं। यदि ऐसा न होता तो शायद इनके जैसा विवादित व चर्चित मुलाजिम महकमे में प्रोन्नति न पाता और अब तक अनेको बार उच्चाधिकारियों की तिरछी निगाह का भाजन बनकर निलम्बन व स्थानान्तरण तथा पदावनति ही पाता।  



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