तीस की उम्र कर चुके हैं पार, तो यह मेडिकल टेस्ट कराना ना भूलें
| Agency - Mar 5 2021 2:36PM

कहते हैं कि पहला सुख निरोगी काया। अर्थात् अगर व्यक्ति स्वस्थ है तो वह वास्तव में धनी है। लेकिन आज के समय में हर व्यक्ति किसी ना किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या से जूझता रहता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वह बीमारी के शुरूआती लक्षणों को पहचान नहीं पाता और जब समस्या बढ़ जाती है तो फिर उसे दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है। आमतौर पर इन बीमारियों से बचने का एक आसान तरीका है कि समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए। इसके लिए कुछ टेस्ट करवाए जा सकते हैं।

तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि तीस की उम्र पार करने के बाद व्यक्ति को कौन−कौन से मेडिकल टेस्ट अवश्य करवाने चाहिए−

सीबीसी यानी कंप्लीट ब्लड टेस्ट

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि इसका उपयोग एनीमिया, संक्रमण, कुछ प्रकार के कैंसर, और इसी तरह के निदान के लिए किया जाता है। यह भारतीय महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकतर भारतीयर महिलाएं आयरन की कमी के कारण एनीमिया से पीडि़त हैं और इसलिए उन्हें पूरक की आवश्यकता हो सकती है। खासतौर से, 30 की उम्र पार करने के बाद स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। यदि सीबीसी ठीक है, तो इसे वर्ष में एक बार दोहराया जा सकता है।

ब्लड प्रेशर टेस्ट

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, वैसे तो रक्तचाप में गड़बड़ होने पर ब्लड प्रेशर टेस्ट किया जाता है। लेकिन 30 की उम्र पार करने के बाद समस्या ना होने पर भी यह टेस्ट अवश्य करवाना चाहिए। 120/80 से नीचे एक रीडिंग आदर्श है। यदि रीडिंग सामान्य है, तो अगले वर्ष परीक्षण करें।

ब्लड शुगर टेस्ट

30 की उम्र के बाद व्यक्ति को कई बीमारियां हो जाती हैं और उन्हें इसका पता ही नहीं चलता। इन्हीं स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है मधुमेह। आज के दौर में बेहद कम उम्र में लोगों को इस बीमारी ने अपनी जद में लिया है। इसलिए 30 की उम्र के बाद ब्लड शुगर टेस्ट भी करवाना चाहिए। 12 घंटे के उपवास की अवधि के बाद, यह मधुमेह का पता लगाने में मदद करता है। <99 की रीडिंग सामान्य है, 100 और 110 के बीच पूर्व−मधुमेह इंगित करता है और 110 से अधिक मधुमेह दर्शाता है।

लिपिड प्रोफाइल

आपके हृदय स्वास्थ्य का एक सटीक संकेतक माना जाता है, यह रक्त परीक्षण कुल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, एचडीएल और एलडीएल स्तरों को मापता है। सामान्य रीडिंग वाले लोगों के लिए 2 साल में एक बार परीक्षण की सिफारिश की जाती है। जबकि मोटे लोगों और हृदय रोग या मधुमेह वाले लोगों को साल में एक बार यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। 



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