यमराज, मोबाइल और नेताजी!
| -RN. Feature Desk - Mar 25 2021 12:00PM

-रामविलास जांगिड़ 

एक नेता को रास्ते में यमराज मिल गए। नेताजी ने यमराज को देखते ही पहचान लिया। यमराज नेताजी के डर से थरथर कांपने लगे। इधर नेताजी यमराज देखकर इधर-उधर भागने लगे। दोनों एक दूसरे से डर कर ऐसे भागने लगे जैसे कोई एक सरकार और दूसरा कोई विकास हो। तब यमराज को धर्मराज द्वारा दिया गया टास्क याद आया और हिम्मत करके उन्होंने अपना भैंसा दौड़ाया। भैंसा नेताजी पर इस तरह से झपट पड़ा जैसे बहुमत की सरकार आम आदमी पर झपट पड़ती हो।

यमराज ने फटाक से नेताजी को ऐसे पकड़ लिया जैसे सांपनाथ ने नागनाथ को पकड़ लिया हो। यमराज बहुत देर तक परेशानी में थे, क्योंकि उनका मोबाइल डिस्चार्ज हो चुका था। मोबाइल की बैटरी के प्राण पखेरू उड़ चुके थे। मोबाइल के बिना यमराज के प्राण ऐसे सूख रहे थे, जैसे वोटों के बिना नेताजी, नोटों के बिना अफसर और फोटो के बिना सुंदरी के प्राण सूखते हैं। ब्रह्मांड के कई जीवों से चैटिंग करने को आतुर यमराज बिना मोबाइल बेचैन हो रहे थे।

यमराज ने नेताजी को कहा- 'मैं तुम्हारे प्राण नहीं हरूंगा, अगर तुम मुझे तुरंत ही एक मोबाइल चार्जर दे दोगे।' तब नेता जी ने अपने प्राणों की रक्षा के लिए अपना पावर रिचार्ज बैंक यमराज को ऐसे दिया जैसे वह अपने प्राण दे रहा हो। सच तो यह है कि यमराज नेताजी के प्राण लेने आए थे, लेकिन उनको मोबाइल चार्जर मिलने पर यमराज ने नेताजी को जीवनदान देने का चार्जर घपला कर दिया। सच्ची इस जीवन का मूल आधार ही मोबाइल है। अगर मोबाइल न हो तो जीवन एकदम जिंदा लाश है।

मोबाइल ही जीवन में नया सवेरा, रंगीन रात और सच्चा उल्लास है। जिंदगी और मोबाइल में से कोई एक चुनना हो तो निश्चय ही सभी लोग मोबाइल ही चुनते हैं। जीवन से ज्यादा मोबाइल जरूरी है। तब यमराज ने कहा- "क्योंकि तुमने मुझे मोबाइल चार्जर देखकर मेरा जीवन बचाया है। इसलिए मैं तुम्हें तुम्हारा भाग्य चमकाने के लिए एक मौका देता हूं।" यमराज ने अपने पेंट की पिछली जेब में पड़ी पेन डायरी देकर नेताजी को कहा- "तुम्हारे पास 5 मिनट का समय है। जो चाहे लिख लो।

तुम्हारी इच्छा पूर्ति होगी। क्योंकि तुमने मुझे मोबाइल चार्जर दिया और मेरी जिंदगी बचाई इसलिए यह तुम्हारे लिए एक इनाम है। इस डायरी में जो भी तुम लिखोगे वह फलीभूत हो जाएगा। लेकिन ध्यान रखना समय केवल 5 मिनट ही है।" कहते हुए यमराज ने व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में चैटिंग विभाग के एचआरडी के रूप में अपना उद्बोधन देना शुरू किया। नेताजी ने पहला पन्ना खोलते ही डायरी में देखा कि उनका पक्का साथी नेता चुनाव जीतने वाला है।

तब उसने लिखा मेरे साथी नेता की आने वाले चुनावों में जमानत जप्त हो जानी चाहिए। अगले पृष्ठ में देखा कि उसके सबसे पक्के दोस्त नेता का मंत्री बनना तय है। तब उसने लिखा कि यह तुरंत ही मर जाना चाहिए। ऐसे वह पृष्ठ खोलता गया और अपने दोस्तों को अपने ढंग से निपटाता गया। इस बीच यमराज ने नेता जी की आत्मा पकड़नी शुरू की। नेताजी की आत्मा खूब ढूंढ़ी गई; पर वह नहीं मिली। कहते हैं कि आज भी यमराज पगलाता, रोता, मचलता नेताजी की आत्मा ढूंढ़ता फिर रहा है। लेकिन उसे नेताजी की आत्मा आज तक नहीं मिली!



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