आलसी भूत और ताजा नेताजी
| -RN. Feature Desk - Apr 5 2021 12:53PM

-रामविलास जांगिड़ 

नए अस्पताल के एक पुराने बरगद पर एक युवा भूत रहता था। वह अपनी भूतनी के साथ किच-किच भरा जीवन व्यतीत कर रहा था। साथ ही वह बहुत आलसी टाइप का बंदा था। भूतनी उसे कोई भी काम कहती, तब वह बहुत आलसीपना दिखाता। आदमी की हड्डियां खाते ही वह तुरंत बिस्तर पर लेट जाता। देखते ही देखते उसका शरीर मुटाता जा रहा था। उछल-कूद करते इस भूत के हाथ-पैर सहित पीपल-बरगद की टहनियां भी टूट चुकी थी। भूत की हड्डियां कई बार टूट चुकी थी।

नतीजन वह इसी हॉस्पिटल  में जा चुका है। इस चक्कर में वह अखबार में फिटनेस संबंधी कोई खबरें पढ़ता तक नहीं। शरीर को ठीक रखने के लिए कई तरह के योग करने का भी सुझाव दिया जाता है, लेकिन भूत के समझ में आवे तब ना! डराने के काम में भी बहुत आलसी बना रहता। बिल्कुल डरा नहीं पाता। इसलिए इस भूत को बच्चे लोग बहुत चिढ़ाते। वे उसके बाल खींच जाते थे। उसके सींग खींच लेते थे। उसके अस्थि-पंजर में गुदगुदी मचाया करते थे। भूतनी खुद उसके ऐसे व्यवहार से परेशान रहा करती।

एक बार श्मशान के तीन आलसी कामचोर टट्टू भूत एक साथ हड्डियां चाट रहे थे। उनके साथ यह परम आलसी भूत भी था। हड्डियों में मिर्ची कम थी। सभी भूतों के आपस में बहस हो गई थी, मिर्ची कौन लाएगा? तब आलसी भूत बोला -‘जो पहले बोलेगा वही मिर्ची लाएगा।’ तीनों भूत बैठे रहे। कोई आपस में किसी से कुछ नहीं बोला। ना ही किसी ने कुछ खाया। दिन, महीने और साल गुजरने लगे। तीनों भूत बेहोश हो गए। वे मर कर नेता बनने की कगार पर पहुंच गए। तीनों की पत्नीव्रता भूतनियां समझाने लगी। क्यों मर कर नेता बनना चाहते हो? फिर भी वे नहीं माने। तब उनके अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू हुई। पहले भूत को जलाया जाने लगा, तो वह बोल पड़ा- ‘अरे मैं तो अभी जिंदा हूं।’ तब बाकी दोनों आलसी भूत चिल्लाए-‘चल बेटा! अब मिर्ची ला!' ऐसा सुनकर सारे श्मशान की चमगादड़ों में सन्नाटा फैल गया। 

एक दिन भूतनी ने भूत से कहा- माय डियर घोस्ट! जरा श्मशान घाट की गुफा से बाहर जाकर तो देखो, धूप आ रही है क्या? मुझे आज बालों में डाई लगानी है। भूत चीखा- हां, धूप आ रही है। भूतनी- बिना बाहर देखे तुम्हें कैसे पता लगा? भूत- श्मशान में अभी-अभी नेताजी की एक ताजा सूखी हुई कड़क लाश अंदर आई है। मतलब साफ है धूप आ रही है। तब भूतनी ने चिड़चिड़ाते हुए कहा- अच्छा, जरा बत्ती तो बुझा दे यार। रोशनी में नींद भी नहीं आ रही है और मुझे डर भी लग रहा है। भूत- माय डियर भूतनी! जरा अपनी आंखें बंद कर लो ना प्लीज! फटाक से घनघोर अंधेरा हो जाएगा। डर श्मशान में कहीं खो जाएगा। तब भूतनी ने गुस्सा करते हुए चिल्लाकर कहा- कम से कम इस श्मशानी गुफा का दरवाजा तो बंद कर दो! भूत- अब दो काम मैंने कर दिए। एक-आध काम तो तुम खुद भी कर लिया करो डियर! कहकर भूत श्मशानी गुफा में पसर गया। भूतनी ताजा खून की तलाश में खंडहर के पुराने पीपल पर गुलांछे लगाने के लिए उठ खड़ी हुई। वह जैसे ही वहां गई; उसने देखा कि खून चूसने के लिए वहां पहले से ही कई ताजा नेता गुलांछे भर रहे हैं।



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