विधानसभा की कैंटीन से बैरंग बहरिया दिए गए पत्रकार, किसने तोड़ी परिपाटी?
| Rainbow News - Jul 21 2017 12:35PM

मीडिया में योगी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की साजिश

लखनऊ। विधानसभा अध्‍यक्ष हृदय नारायण दीक्षित स्‍वघोषित बड़े विद्वान व्‍यक्ति हैं। उन्‍होंने विधानसभा में अंग्रेजों के जमाने की कई परिपाटी तोड़ी। उन्‍होंने अंग्रेजकालीन परंपरा को दरकिनार कर भारतीय परंपरा को अपनाते हुए राज्‍यपाल का स्‍वागत किया। पर, आज दीक्षित के नेतृत्‍व में विधानसभा में भारतीय परंपरा तो तोड़ी ही गई, साथ ही मीडियाकर्मियों का अपमान भी किया गया। वह भी तब, जब श्री दीक्षित स्‍वयं स्‍वतंत्र पत्रकार हैं। लंबे अरसे से विधानसभा में यह व्‍यवस्‍था चली आ रही है कि बजट सत्र के दौरान जिस विभाग के बजट पर चर्चा होती है और प्रस्‍ताव पास होता है, वह उस दिन विधानसभा के कैंटीन में विधायकों और पत्रकारों के लिए भोजन की व्‍यवस्‍था करता है। यह परिपाटी, परंपरा, जो भी कह लीजिए, लंबे समय से चली आ रही है। विधायकों के साथ पत्रकारों के लिए भी यह भोजन निशुल्‍क उपलबध रहता है।

पर, इस बार यह परंपरा भी विधानसभा अध्‍यक्ष के नेतृत्‍व में तोड़ दी गई। हर बजट सत्र के दौरान जब पत्रकार कैंटीन की तरफ बढ़े तो उन्‍हें मार्शलों द्वारा रोक दिया गया। उन्‍हीं मार्शलों द्वारा, जो विधानसभा में पीईटीएन पाउडर जाने से नहीं रोक पाए। कुछ पत्रकारों ने पास दिखाकर कहा कि कैंटीन उनके लिए तो एलाऊ रहता है, इस पर मार्शलों ने सख्‍ती से कहा कि इस बार एलाऊ नहीं है। इस बार यह परंपरा खत्‍म कर दी गई है। बताया जा रहा है कि कुछ पत्रकार किसी माननीय के साथ कैंटीन पहुंच गए तो उन्‍हें भी मार्शलों ने खाने से पहले ही पहचान पूछकर बाहर कर दिया। विधानसभा में बजट सत्र के दौरान पहली बार पत्रकारों को इस तरीके से बेइज्‍जत किया गया है। कुछ लोगों का मानना है कि एक लॉबी जानबूझकर पत्रकारों को बेइज्‍जत कर रही है ताकि वह सरकार के खिलाफ हो जाएं। नाराज पत्रकारों ने बहिष्‍कार किया। ऐसा ही एक कांड मुख्‍यमंत्री के भोज के समय किया गया था।

सियासी सूत्र बताते हैं कि विधानसभा अध्‍यक्ष दीक्षित भी शायद इसी एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं। एक तरफ वह योगी आदित्‍नाथ के खास बनने का उपक्रम कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ अपने एजेंडे के तहत पत्रकारों को उत्‍तेजित करके, उन्‍हें बेइज्‍जत करके योगी के खिलाफ कलम चलाने को मजबूर कर रहे हैं। उनके अलावा इस काम में संगठन के कुछ लोग भी इसी में लगे हुए हैं। कुल मिलाकर बेहतरीन सरकार चला रहे योगी कुछ बेईमानों को रास नहीं आ रहे हैं। कुछ दिन पूर्व सीएम आवास पर हुए मुख्‍यमंत्री संग भोज में भी ऐसा ही किया गया था। मुख्‍यमंत्री के साथ भोज कौन करेगा, यह भाजपा के मीडिया विभाग द्वारा तय किया गया था। भाजपा के मीडिया विभाग से भेजे गए सूची पर ही सूचना विभाग ने चुनिंदा पत्रकारों को आमंत्रित किया था। सूत्र बताते हैं कि मीडिया प्रभारी हरिश्‍चंद्र श्रीवास्‍तव, जो मनोज सिन्‍हा और सुनील बंसल के खास माने जाते हैं, ने पत्रकारों की लिस्‍ट तैयार की थी।

इस लिस्‍ट में उन्‍हीं पत्रकारों को तरजीह दी गई, जिन्‍हें सपा में प्रमुखता मिलती थी। श्रीवास्‍तव के इस हरकत से संघी बैकग्राउंड वाले पत्रकार खासे नाराज भी हुए थे। श्रीवास्‍तव ने ऐसे-ऐसे पत्रकारों को सीएम के पास भेज दिया, जिनका लिखने-पढ़ने से कोई बहुत वास्‍ता नहीं था। सपा दौर में उपेक्षित पत्रकार हरिश्‍चंद्र के इस कदम से खासे दुखी हुए, लेकिन श्रीवास्‍तव की चलती के आगे वह कुछ कर नहीं पाए। बताया जाता है कि हरिश्‍चंद्र श्रीवास्‍तव भी किसी खास एजेंडे के तहत ही वा‍स्‍तविक पत्रकारों को योगी के कार्यक्रम से दूर रखा ताकि उनकी नाराजगी का असर सीएम पर पड़े। ये वही हरिश्‍चंद्र श्रीवस्‍तव हैं, जो मनोज सिन्‍हा के सीएम बनने की संभावनाओं से खासे खुश थे, लेकिन योगी के सीएम बनने ही इनके चेहरे पर दुख के भाव नजर आने लगे थे। एक पत्रकार नाम ना छापने की शर्त पर कहते हैं कि यह कोई लापरवाही नहीं है, बल्कि एक सोची समझी साजिश के तहत मीडिया में योगी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश हो रही है ताकि उनको हटाकर किसी ऐसे बेईमान को सीएम बना दिया जाए जो लूटने-खाने की पूरी आजादी दे।



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