अम्बेडकरनगर के डी.एफ.ओ. अशोक कुमार शुक्ला एक करिश्माई शख्सियत, जो...........
| Rainbow News - Jul 24 2017 4:49PM

रेनबोन्यूज यहाँ कुछ ऐसे सरकारी अधिकारियों के बारे में प्रकाशित कर रहा है जो अपने विभाग के उच्च ओहदे पर रहते हुए एक ही स्थान पर दीर्घ कालिक सेवा दे रहे हैं या दे चुके हैं। ऐसे अधिकारियों के बारे में लोगों के कई मत हो सकते हैं कोई इन्हें अंगद का पाँव कहता है तो कोई सत्ता के गलियारों में ऊँची पहुँच रखने वाला। अधिकांश लोगों की जुबान से ऐसे अधिकारियों को लोकप्रिय भी कहते सुना जाता है। रेनबोन्यूज नेटवर्क के संवाददाताओं ने प्रदेश के कई जनपदों से ऐसी खबरें प्रकाशनार्थ प्रेषित की हैं जिनमें अंगद का पाँव, सत्ता पहुँच रखने वाला तथा लोकप्रिय अधिकारियों के बारे में संक्षिप्त में लिखा गया है।

सरकारी विभागों के ऐसे अधिकारी जो जनपद में एक ही पद पर पाँच या इससे अधिक वर्षों तक रहकर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं को लेकर यत्र-तत्र-सर्वत्र चर्चाएँ होना शुरू हो गई हैं। ऐसे में रेनबोन्यूज का दायित्व बनता है कि उन अधिकारियों के अधिक ठहराव की अवधि को लेकर कुछ खोजबीन करे और इसके पीछे का कारण पता लगाए।

यहाँ हम अम्बेडकरनगर जनपद की बात कर रहे  हैं-

उत्तर प्रदेश सूबे का निजाम बदले चार माह का समय हो गया है और इन चार महीनों में सरकारी विभागों में व्यापक रूप से तबादले किए गए हैं। इन तबादलों को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि ये तबादले सरकार द्वारा घोषित नीति के अनुसार हुए हैं। क्योंकि ज्यादातर तबादला उन अधिकारियों का किया गया है जिन्होंने मात्र दो या ढाई वर्ष की अल्पावधि ही एक स्थान पर बिताई है। तबादलों में शायद पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिसका परिणाम यह रहा कि ऐसे अधिकारी अपने स्थान से हटाकर दूसरे जिलों में भेज दिए गए।

प्रभागीय वनाधिकारी पद पर वर्ष 2012 से अभी तक अशोक कुमार शुक्ला जमे हुए हैं। यहाँ बता दें कि वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम स्वरूप बनी अखिलेश सरकार में इन्हें यहाँ नियुक्ति मिली थी और तभी से ये इस महत्वपूर्ण विभाग के प्रमुख के रूप में तैनात हैं और विभागीय कार्यों का सम्पादन कर रहे हैं। इन्हें अब लोग अंगद का पाँव/सत्ता के गलियारे में ऊँची पहुँच रखने वाला कहने लगे हैं। प्रबुद्ध वर्गीय चिन्तनशील और राजनीति में दखल रखने वाले लोगों को भी आश्चर्य हो रहा है कि अशोक कुमार शुक्ला का तबादला आखिर अभी तक क्यों नहीं हुआ? हालांकि विभागीय कार्यालय में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि ए.के. शुक्ला का ट्रान्सफर जल्द ही होगा और वह प्रोन्नति पाकर मण्डल स्तर पर वन संरक्षक के ओहदे पर नई जगह तैनात किए जाएँगे।

अशोक कुमार शुक्ला ने स्वजातीय मीडियाकर्मी और ब्राण्डेड मीडिया से भले ही दोस्ती की हो परन्तु छुटभैय्ये टाइप के प्रेस/मीडिया कर्मियों को ये घास तक नहीं डालते। प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय के कुछेक खास कर्मचारियों जब-जब इनके बारे में यह पूछा जाता था कि मीडिया से इनके कैसे ताल्लुकात हैं तो वह लोग सीधा उत्तर देते थे कि किसी भी प्रेस/मीडियाकर्मी को एक कप चाय भी नहीं पिलाते। हाँ यह बात अवश्य है कि जो मुँह लगे हैं उनको चना-चबैना, भेली-गुड़ खिलाकर पानी पिलवाते हैं। जो प्रतापगढ़ की मेहमान नवाजी का तरीका है। चाहे कोई मीडिया कर्मी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितता को उजागर करने की परोक्ष-अपरोक्ष बातें करता रहा हो या कुछ और इन्हें इन सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

मूल रूप से प्रतापगढ़ जनपद के निवासी ए.के. शुक्ला ने लखनऊ पर भव्य भवन का निर्माण करा रखा है, जिसमें उनका परिवार ऐशो-आराम की जिन्दगी जी रहा है। यहाँ बता दें कि बीते वर्षों उनके लखनऊ स्थित आलीशान भवन में डकैती की घटना भी हो चुकी है, जिसमें कई लाख रूपए नकद और लाखों के स्वर्णाभूषण लुटेरों ने लूट लिया था। बहरहाल लाखों/करोड़ों की लूट ए.के. शुक्ला के लिए कोई मायने नहीं रखती है। कुछ ही दिनों में हालात पूर्व से भी कई गुना बेहतर बनाने वाले प्रभागीय वनाधिकारी ए.के. शुक्ला के बारे में तरह-तरह की चर्चाएँ होने लगीं। यह कैसा व्यक्ति है जो इतनी लम्बे समय तक वन विभाग जैसे फर्टाइल ओहदे पर जमा हुआ है।

पाठकों यह तो रही डी.एफ.ओ. ए.के. शुक्ला के बारे में। आगामी अंकों में रेनबोन्यूज उन सभी अधिकारियों व उनकी दीर्घकालिक सेवाओं के बारे में आप सबको अवगत कराएगा जो अंगद का पाँव या सत्ता के गलियारे में ऊँची पहुँच रखने वाला कहे जाते हैं। इस अंक में फिलहाल इतना ही..............



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