खेल भावना से मिटाई जा सकती है आपसी वैमनस्यता
| Rainbow News - Aug 3 2017 2:35PM

निशानेबाजी में छुपा है लक्ष्य भेदन का मूल मंत्र

सामाजिक जीवन में प्रेरणादायक प्रसंगों के पदार्पण से ही सफलतायें कदम चूमने के लिए आत्मबल प्राप्त करती है। विभिन्न आयामों की बहुरंगी आभा से आलोकित संसार प्रत्यक्षीकरण पर आधारित है। ऐसे में शारीरिक और मानसिक क्षमताओं के अनुपात से ही आचरण को मूर्त रूप दिया जाता है। इन क्षमताओं के विकास के लिए खेलों की परम्पराओं स्थापित किया गया। जहां कुश्ती, जिमनास्टिक, मलखम्ब, दौड, कूद जैसी प्रतियोगिताओं से शारीरिक विकास होता है वहीं शतरंज, कैरम, निशानेबाजी जैसे कारक मानसिक प्रगति के देवतक हैं। व्यक्तिगत अभिरुचियां ही इस दिशा में अग्रसर होने के लिए धरातल तैयार करतीं है। खेलों के माध्यम से ही समरसता, सहयोग और समर्पण जन्म लेता है। यही वे रेखांकित किये जाने योग्य बिंदु हैं जिन पर चल कर शत्रु भाव पर विजय प्राप्त की जा सकती है। खेलों से जुडे प्रश्नों का जमावडा बढता ही जा रहा था। उनको शांत करने के लिए उपाय की खोज भी चल रही थी। तभी आईपीएस विनीत खन्ना का चेहरा जेहन में उभरने लगा।

वे प्रतिभावान पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ राष्ट्रीयस्तर के निशानेबाज भी हैं। तत्काल उन्हें फोन लगाया। दूसरी ओर से आने वाले उत्साहपूर्ण स्वागत भरे शब्दों ने मन में मिठास घोल दी। समय और स्थान का निर्धारण हुआ और आत्मिक वातावरण हम आमने-सामने थे। औपचारिताओं-अनौपचारिकताओं के हिडोले पर कुशलक्षेम की आदान-प्रदान हुआ। बिना समय गंवाये हमने खेल भावना से समरसता भरे वातावरण के निर्माण के पीछे छुपे कारकों पर प्रकाश डालने की बात कही। ‘सहज जिंदगी, सरल जिंदगी’ के आदर्श वाक्य पर चलने वाले विनीत के चेहरे ने गम्भीरता का आवरण ओठना शुरू कर दिया। क्रीडा के मैदान को सौहार्द भरे घर के रूप में परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि यही एक मात्र ऐसा स्थान होता है जहां दुश्मन की तरह व्यवहार करने वाला प्रतिस्पर्धी भी खेल की पूर्णाहुति होते ही मित्र की श्रेणी में आ जाता है।

एक दूसरे से कुछ सीख लेने की ललक जागृत हो जाती है। हाथ मिलाने से लेकर गले मिलाने तक की उत्सुकता का पदार्पण होता है। फिर मिलने की आशा से विदाई ली जाती है। खेल के दौरान एक टीम का उत्साहवर्धन करने वाले दर्शकों का समूह दूसरे पर करारे शब्दों का प्रयोग करते हैं और खेल समाप्ति के पश्चात एक साथ मिलकर चाय पीते हैं। ऐसी विपरीतता कहीं अन्यत्र देखने को नहीं मिलती। हमने बीच में ही उनकी निशानेबाजी से जुडी भावना को कुरेदना शुरू। शून्य की ओर निहारते हुए वे अतीत की गहराई में डूबते चले गये। उनका अल्हड बचपन यादों में लौट आया। हाथों में गुलेल, आम के पेडों का झुरमुट और कन्धे पर लटका थैला एक मासूम बालक के अन्तः में जीवित हो उठा। पहले प्रयास में ही आम गिराने के लिए पहचान बना चुके विनीत ने युवा अवस्था में प्रवेश किया।

प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के लिए विधिवत तैयारी शुरू कर दी और सन् 1990 में पुलिस अधिकारी के रूप में सफलता ने दस्तक दी। ट्रेनिंग के दौरान निशानेबाजी की सोई क्षमताओं ने अंगडाई लेकर हौले से दरवाजा खोला। खेल प्रतिभा को मुखरित होने का पूरा मौका मिला उज्जैन में हुई पदस्थापना के दरमियान। वहां के रेवती रैंज में बीएसएफ के साथ निरंतर अभ्यास किया। शासन ने भी शूटिंग के लिए विशेष हथियार खरीदने का लाइसेंस जारी किया। ग्वालियर में एसएएफ में पहुंचते ही निशानेबाजी जवान होकर कुछ कर गुजरने के लिए फडफडाने लगी। दिल्ली की कर्णी सिंह रेंज में जोर आजमाइश हुई। आल इण्डिया शूटिंग स्पोर्टस के ओपन वर्ग में क्वालीफाई करते ही राष्ट्रीय स्तर के खिलाडी का तमगा लग गया। कुछ देर उनके वर्तमान में लौटने की प्रतीक्षा करने के बाद हमने उन्हें झकझोरते हुए अवचेतन से चेतन में लाने का प्रयास किया। खेद प्रगट करते हुए वे हमारा मुंह ताकने लगे। हमने कहा कि निशानेबाजी से जीवन का कौन सा पक्ष मजबूत होता है और क्यों।

सीधा और सपाट प्रश्न सुनकर उनके हौठों पर मुस्कुराहट नाचने लगी। धैर्य, एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति सचेत रहने के गुणों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि निशानेबाजी से ज्यों-ज्यों महारत हासिल होती जाती है त्यों-त्यों इन गुणों का विकास होता जाता है। लक्ष्य भेदन की मूल मंत्र छुपा है निशानेबाजी में। अनुशासित जीवन से लेकर संतुलित दिनचर्या के बिना सफलता प्राप्त करने की कल्पना करना, मृगमारीचिका के पीछे भागने जैसा है। इसीलिए निशानेबाज कठिन से कठिन परिस्थितियों में न केवल अडिग रहता है बल्कि समस्याओं का निदान करने में भी सक्षम होता है। बातचीत चल ही रही थी कि उनके वर्दाधारी जवान ने कमरे में प्रवेश करके मेज पर स्वल्पाहार के साथ चाय परोसना शुरू कर दी। व्यवधान उत्पन्न हुआ किन्तु तब तक हमें अपने विचारों की उथल-पुथल से काफी हद तक राहत मिल चुकी थी। भोज्य पदार्थों को सार्थकता तक पहुंचाने के पश्चात हमने पुनः मिलने का उन्हें आश्वासन दिया और वापिस अपने आवास की ओर प्रस्थान किया। इस बार बस इतना ही। एक नये मुद्दे के साथ अगले सप्ताह फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए खुदा हाफिज।



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