पवित्र त्योहार रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं
| Rainbow News - Aug 7 2017 2:45PM

-प्रमोद कुमार दुबे/ रक्षा बंधन का पर्व विशेष रुप से भावनाओं और संवेदनाओं का पर्व है, एक ऎसा बंधन जो दो लोगो को स्नेह के धागे से बांध ले, रक्षा बंधन को भाई-बहन तक ही सीमित रखना सही नहीं होगा, बल्कि ऎसा कोई भी बंधन जो किसी को भी बांध सकता है, भाई-बहन के रिश्तों की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए यह बंधन आज गुरु का शिष्य को राखी बांधना, एक भाई का दूसरे भाई को, बहनों का आपस में राखी बांधना और दो मित्रों का एक-दूसरे को राखी बांधना, माता-पिता का संतान को राखी बांधना हो सकता है!!

आज के परिपेक्ष्य में राखी केवल बहन का रिश्ता स्वीकारना नहीं है अपितु राखी का अर्थ है, जो यह श्रद्धा व विश्वास का धागा बांधता है. वह राखी बंधवाने वाले व्यक्ति के दायित्वों को स्वीकार करता है, उस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने की कोशिश करता है!! वर्तमान समाज में हम सब के सामने जो सामाजिक कुरीतियां सामने आ रही है, उन्हें दूर करने में रक्षा बंधन का पर्व सहयोगी हो सकता है, आज जब हम बुजुर्ग माता - पिता को सहारा ढूंढते हुए वृ्द्ध आश्रम जाते हुए देखते है, तो अपने विकास और उन्नति पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ पाते है, इस समस्या का समाधन राखी पर माता-पिता को राखी बांधना, पुत्र-पुत्री के द्वारा माता पिता की जीवन भर हर प्रकार के दायित्वों की जिम्मेदारी लेना हो सकता है, इस प्रकार समाज की इस मुख्य समस्या का सामाधान किया जा सकता है!!

इस प्रकार रक्षा बंधन को केवल भाई बहन का पर्व न मानते हुए हम सभी को अपने विचारों के दायरे को विस्तृ्त करते हुए, विभिन्न संदर्भों में इसका महत्व समझना होगा, संक्षेप में इसे अपनत्व और प्यार के बंधन से रिश्तों को मजबूत करने का पर्व है, बंधन का यह तरीका ही भारतीय संस्कृ्ति को दुनिया की अन्य संस्कृ्तियों से अलग पहचान देता है !! आज समय के साथ पर्व की शुभता में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि इसका महत्व ओर बढ गया है, आज के सीमित परिवारों में कई बार, घर में केवल दो बहने या दो भाई ही होते है, इस स्थिति में वे रक्षा बंधन के त्यौहार पर मासूस होते है कि वे रक्षा बंधन का पर्व किस प्रकार मनायेगें, उन्हें कौन राखी बांधेगा , या फिर वे किसे राखी बांधेगी, इस प्रकार कि स्थिति सामान्य रुप से हमारे आसपास देखी जा सकती है!!

ऎसा नहीं है कि केवल भाई -बहन के रिश्तों को ही मजबूती या राखी की आवश्यकता होती है, जबकि बहन का बहन को और भाई का भाई को राखी बांधना एक दुसरे के करीब लाता है, उनके मध्य के मतभेद मिटाता है, आधुनिक युग में समय की कमी ने रिश्तों में एक अलग तरह की दूरी बना दी है. जिसमें एक दूसरे के लिये समय नहीं होता, इसके कारण परिवार के सदस्य भी आपस में बातचीत नहीं कर पाते है, संप्रेषण की कमी, मतभेदों को जन्म देती है, और गलतफहमियों को स्थान मिलता है, अगर इस दिन बहन -बहन, भाई-भाई को राखी बांधता है तो इस प्रकार की समस्याओं से निपटा जा सकता है. यह पर्व सांप्रदायिकता और वर्ग-जाति की दिवार को गिराने में भी मुख्य भूमिका निभा सकता है, जरुरत है तो केवल एक कोशिश की !!

आज जब हम रक्षा बंधन पर्व को एक नये रुप में मनाने की बात करते है, तो हमें समाज, परिवार और देश से भी परे आज जिसे बचाने की जरुरत है, वह सृ्ष्टि है, राखी के इस पावन पर्व पर हम सभी को एक जुड होकर यह संकल्प लें, राखी के दिन एक स्नेह की डोर एक वृक्ष को बांधे और उस वृ्क्ष की रक्षा का जिम्मेदारी अपने पूरे लें. वृ्क्षों को देवता मानकर पूजन करने मे मानव जाति का स्वार्थ निहित होता है. जो प्रकृ्ति आदिकाल से हमें निस्वार्थ भाव से केवल देती ही आ रही है, उसकी रक्षा के लिये भी हमें इस दिन कुछ करना चाहिए.

"हम्रारे शास्त्रों में कई जगह यह उल्लेखित है कि
जो मानव वृ्क्षों को बचाता है, वृक्षों को लगाता है,
वह दीर्घकाल तक स्वर्ग लोक में निवास पाकर
भगवन इन्द्र के समान सुख भोगता है."

पेड -पौध बिना किसी भेदभाव के सभी प्रकार के वातावरण में स्वयं को अनुकुल रखते हुए, मनुष्य जाति को जीवन दे रहे होते है, इस धरा को बचाने के लिये राखी के दिन वृक्षों की रक्षा का संकल्प लेना बेहद जरूरी हो गया है, आईये हम सब मिलकर राखी का एक धागा बांधकर एक वृ्क्ष की रक्षा का वचन ले!!



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